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ढाई एकड़ जमीन वाले परिवारों को राशन से वंचित करना गरीबों के साथ अन्याय :- राजू सोढ़ी 

कृष्ण कुमार कुंजाम ब्यूरो जगदलपुर 

 

छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा ढाई एकड़ से अधिक जमीन रखने वाले परिवारों को राशन योजना से बाहर करने की तैयारी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर जैसे आदिवासी इलाकों में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनपद सदस्य दरभा राजू सोढ़ी ने इस निर्णय को “गरीबों के साथ खुला धोखा और अन्याय” बताया है। उन्होंने कहा कि यह नीति सरकार के उस “सुशासन” के वादे को झुठलाती है, जो गरीबों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के नाम पर बनाई गई थी। राजू सोढ़ी का कहना है कि बस्तर के अधिकांश आदिवासी किसानों के पास ढाई एकड़ से अधिक जमीन भले ही कागजों में दर्ज हो, लेकिन वास्तविकता में वह जमीन खेती योग्य नहीं है। पहाड़ी, पथरीली और बंजर जमीन से किसी भी परिवार का पालन-पोषण मुश्किल है। फिर भी सरकार केवल जमीन की माप के आधार पर यह तय कर रही है कि कौन गरीब है और कौन नहीं। यह नीति न केवल गलत है, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन यथार्थ की अनदेखी भी है। राज्य सरकार के इस कदम से हजारों परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। राशन कार्ड निरस्त होने का अर्थ है कि गरीब परिवारों की रसोई से अनाज का अभाव शुरू हो जाएगा। ऐसे में सरकार के “ग़रीबी उन्मूलन” के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। राजू सोढ़ी ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से केंद्र के मापदंडों पर आधारित है, जबकि राज्य सरकार को अपने स्थानीय हालात के अनुसार मानदंड तय करने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो बस्तर के किसान, मजदूर और आदिवासी समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। इस मुद्दे को उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब यह मामला राज्य सरकार के लिए राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है, क्योंकि आदिवासी और किसान वर्ग ही छत्तीसगढ़ की राजनीतिक रीढ़ हैं। यह सरकार सुशासन नहीं, गरीबों का हक छीनने वाली सरकार बन गई है।राशन गरीबों का अधिकार है, कोई एहसान नहीं।

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