RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

खबर का असर_बस्तर की माटी न्यूज़ का प्रयास लाया रंग!

क्या अब हर जरूरतमंद को न्याय पाने के लिए अखबार की सुर्खियां बनने का इंतजार करना पड़ेगा?

100% दिव्यांग मदन नागेश का आधार पंजीयन सफल, मां की मेहनत और प्रशासन की लगातार कोशिशें लाई रंग

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

एक मां की उम्मीद, सरकारी दफ्तरों के चक्कर और आखिरकार आधार पंजीयन की सफलता! लेकिन इस कहानी के पीछे छिपा सवाल व्यवस्था से है—क्या हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान होने के लिए उसका मामला समाचार पत्र की सुर्खियां बनना जरूरी है?

कहते हैं, मां की ममता के सामने बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है। लेकिन जब एक मां अपने पूर्ण दिव्यांग बेटे को पहचान दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर उम्मीद लेकर पहुंचे और बार-बार कोशिशों के बावजूद निराश होकर लौटे, तो सवाल केवल एक आधार कार्ड का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी बन जाता है।

ग्राम मुड़ा गांव निवासी 100 प्रतिशत दिव्यांग मदन नागेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बेटे का आधार कार्ड बनवाने की उम्मीद लेकर उनकी मां कई बार गरियाबंद कलेक्ट्रेट तक पहुंचीं। कभी लोगों से पैसे उधार मांगे, तो कभी गाड़ी का किराया जुटाकर बेटे को लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचीं। मां की आंखों में एक ही सपना था—किसी तरह उसके बेटे का आधार बन जाए, ताकि उसे भी जरूरी सरकारी प्रक्रियाओं में अपनी पहचान से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

लेकिन विडंबना देखिए! एक मां अपने दिव्यांग बेटे को लेकर बार-बार दफ्तर पहुंचती रही, मगर आधार पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। हर बार उम्मीद लेकर पहुंचना और फिर निराश होकर लौटना, किसी भी मां के लिए कितना पीड़ादायक रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

सवाल यह है कि क्या किसी जरूरतमंद की मजबूरी तब तक व्यवस्था की नजर में गंभीर नहीं होती, जब तक वह खबर नहीं बन जाती?

जब मामला मीडिया के सामने आया, तब जागी उम्मीद!

मदन नागेश की मां की परेशानी जब मीडिया के सामने आई, तो मामले ने एक नई दिशा पकड़ी। इसके बाद प्रशासन ने प्रकरण में रुचि दिखाई और आधार पंजीयन कराने के लिए विशेष प्रयास शुरू हुए।

यहां जिला प्रशासन की पहल और संबंधित कर्मचारियों की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। EDM गरियाबंद के निर्देश पर तहसील कार्यालय अमलीपदर एवं SDM कार्यालय में संचालित आधार केंद्र के आधार सुपरवाइजर चन्द्रप्रकाश पटेल और वेदप्रकाश सिन्हा ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को गंभीरता से लिया।

आधार पंजीयन की निर्धारित प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर पाने के कारण मदन नागेश का पंजीयन आसान नहीं था। इसके बावजूद संबंधित टीम ने धैर्य और लगातार प्रयासों के साथ प्रक्रिया को पूरा कराने की कोशिश जारी रखी।

आखिरकार, कई प्रयासों के बाद मदन नागेश का आधार पंजीयन सफल हो गया और उन्हें आधार एनरोलमेंट नंबर यानी EID जारी किया गया।

इस सफलता के साथ एक मां के लंबे इंतजार को राहत मिली। जिस काम के लिए वह बार-बार सरकारी दफ्तरों तक पहुंची थीं, वह आखिरकार पूरा हुआ। परिवार के चेहरे पर खुशी लौटी और मां की उम्मीद को नया सहारा मिला।

बस्तर की माटी न्यूज़ के प्रयास का असर सामने आया, तो दूसरी तरफ प्रशासन और आधार टीम की लगातार मेहनत भी रंग लाई।

यह केवल एक खबर का असर नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, मीडिया की जनहित में भूमिका और प्रशासन की संवेदनशील पहल का साझा परिणाम है।

एक तरफ मां का संघर्ष, दूसरी तरफ विभाग की मेहनत—तो फिर बाकी लोगों की बारी कब?

इस पूरे मामले में दो तस्वीरें सामने आती हैं।

पहली तस्वीर_एक मां की, जो अपने 100 प्रतिशत दिव्यांग बेटे को आधार जैसी जरूरी पहचान दिलाने के लिए लोगों से पैसे उधार मांगती है, गाड़ी का किराया जुटाती है और बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटती है।

दूसरी तस्वीर_प्रशासन और आधार टीम की, जिसने मामले को गंभीरता से लेने के बाद लगातार प्रयास किए और अंततः आधार पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कराने में सफलता हासिल की।

पहली तस्वीर व्यवस्था के सामने खड़े एक जरूरतमंद परिवार के संघर्ष को दिखाती है, जबकि दूसरी तस्वीर यह साबित करती है कि कठिन प्रक्रिया भी धैर्य, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाई जा सकती है।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब लगातार प्रयासों से 100 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्ति का आधार पंजीयन संभव हो सकता है, तो फिर दूसरे जरूरतमंद लोगों को बार-बार दफ्तरों और सीएससी सेंटरों के चक्कर क्यों काटने पड़ते हैं?

यहां सवाल किसी एक कर्मचारी या अधिकारी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करने का है, जहां हर व्यक्ति की परेशानी को गंभीरता से सुना जाए और नियमानुसार समाधान के लिए ईमानदार प्रयास किए जाएं।

किसी को जाति प्रमाणपत्र बनवाना है, किसी की छोटी-सी राजस्व समस्या लंबित है, कोई पेंशन के लिए परेशान है, तो कोई दूसरे जरूरी दस्तावेज के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। ऐसे में यदि हर मामले में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी समस्या को अपनी जिम्मेदारी समझकर समाधान की दिशा में काम करें, तो लोगों की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।

रामराज्य और विकसित भारत का सपना—सुर्खियों से नहीं, सेवा से होगा साकार!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण उद्देश्य है। लेकिन इस संकल्प को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी केवल भाषणों या घोषणाओं से पूरी नहीं होगी। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी कार्यालयों में बैठे हर जिम्मेदार व्यक्ति के भीतर सेवा भावना और संवेदनशीलता हो।

क्योंकि विकसित भारत की पहचान केवल बड़ी-बड़ी इमारतें, चौड़ी सड़कें और चमकते शहर नहीं हैं; विकसित भारत की असली पहचान यह भी है कि एक जरूरतमंद मां को अपने दिव्यांग बेटे का अधिकार पाने के लिए बार-बार उधार मांगकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

रामराज्य का सपना भी तभी सार्थक होगा, जब आम नागरिक को अपनी जायज समस्या के समाधान के लिए किसी सिफारिश, दबाव या मीडिया की सुर्खियों का सहारा लेने की मजबूरी न हो।

आखिरकार, सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना है, न कि उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भेजते रहना।

अगर मदन नागेश के मामले में दिखाई गई संवेदनशीलता हर जरूरतमंद के प्रति अपनाई जाए, तो जाति प्रमाणपत्र से लेकर राजस्व संबंधी मामलों और अन्य जनसमस्याओं तक समाधान की राह आसान हो सकती है।

क्योंकि खबर का काम व्यवस्था को आईना दिखाना है, लेकिन हर समस्या का समाधान खबर बनने के बाद ही हो—यह किसी भी संवेदनशील प्रशासन के लिए आदर्श स्थिति नहीं हो सकती।

बस्तर की माटी न्यूज़ की पहल का संदेश

मदन नागेश का आधार पंजीयन सफल होना निश्चित रूप से राहत और खुशी की बात है। इसके लिए जिला प्रशासन, EDM गरियाबंद तथा आधार सुपरवाइजर चन्द्रप्रकाश पटेल और वेदप्रकाश सिन्हा के प्रयास सराहनीय हैं।

लेकिन इस घटना से निकला सबसे बड़ा संदेश यही है कि किसी जरूरतमंद की समस्या को गंभीरता से लेने के लिए उसके समाचार बनने का इंतजार नहीं होना चाहिए।

मीडिया की भूमिका जनसमस्याओं को सामने लाना है और प्रशासन की जिम्मेदारी उन समस्याओं का समाधान करने की दिशा में समय पर कदम उठाना है। जब दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उसका लाभ सीधे आम जनता को मिलता है।

आज मदन नागेश की मां के चेहरे पर उम्मीद की किरण लौटी है। अब जरूरत इस बात की है कि यह संवेदनशीलता केवल एक मामले तक सीमित न रहे, बल्कि हर उस व्यक्ति तक पहुंचे, जो अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालयों की चौखट पर आता है।

याद रखिए—जब एक खबर से किसी परिवार की परेशानी दूर हो सकती है, तो संवेदनशील प्रशासन की पहल से हजारों परिवारों की मुश्किलें भी आसान हो सकती हैं।

यही है जनसेवा का असली अर्थ, यही है सुशासन की पहचान और यही है विकसित भारत की ओर बढ़ने का रास्ता।

बस्तर की माटी न्यूज़—जनता की आवाज, व्यवस्था का आईना!

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग