तंग गलियों से अमेरिका के फैशन शो तक पहुंची प्रीति प्रजापति, गरीबी को हराकर हौसले ने लिखी सफलता की नई कहानी!
कभी लोगों ने उड़ाया मजाक, किसी ने कहा ‘काली बिल्ली’, तो किसी ने बताया ‘स्लमडॉग मिलियनेयर पार्ट-2’; आज वही प्रीति अपने हुनर और हौसले से दुनिया में बना रही हैं पहचान
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),विशेष रिपोर्ट
कहते हैं कि सपने देखने के लिए दौलत की नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए जुनून, हौसले और लगातार मेहनत करने की जरूरत होती है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि इंसान अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित हो, तो अभावों की दीवारें भी उसकी उड़ान नहीं रोक सकतीं। इस कहावत को सच कर दिखाने वाली भोपाल की प्रीति प्रजापति आज अपने संघर्ष, आत्मविश्वास और कामयाबी को लेकर चर्चा में हैं।

एक ऐसा परिवार, जिसके पास न आलीशान मकान था, न मॉडलिंग के लिए कोई स्टूडियो और न ही महंगे कपड़े खरीदने की हैसियत। घर के एक हिस्से में परिवार चलाने के लिए छोटी-सी दुकान और बाकी जगह में रहने-सोने का इंतजाम। बाहर निकलने के लिए तंग रास्ता, आसपास लोगों की आवाजाही और गायों का तबेला। लेकिन इसी सीमित जगह में प्रीति ने एक ऐसा सपना संजोया, जिसकी उड़ान ने उन्हें देश की सीमाओं से बाहर तक पहचान दिलाई।

जिस कमरे में परिवार की जिंदगी सिमटी थी, वहीं से शुरू हुई सपनों की उड़ान!
प्रीति के पिता बिहार से भोपाल आए और यहां एक स्लम बस्ती में अपने परिवार के साथ बस गए। सीमित संसाधनों के बीच परिवार का जीवन आगे बढ़ रहा था। प्रीति दो बहनों में बड़ी हैं। लॉकडाउन के बाद पढ़ाई छूटने के दौर में उन्होंने घर पर रहते हुए कुछ नया करने की कोशिश शुरू की।

शुरुआत में प्रीति ने सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाने का प्रयास किया। लेकिन वीडियो एडिटिंग और लिप-सिंकिंग जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिली। कई लोग ऐसी असफलता के बाद कोशिश करना छोड़ देते हैं, लेकिन प्रीति ने हार मानने के बजाय अपने हुनर को पहचानने की कोशिश की।
उन्होंने मॉडलिंग और रैंप वॉक की दिशा में कदम बढ़ाया। अपने घर के छोटे-से कमरे में ही मॉडलिंग का सेटअप तैयार किया और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लगीं।

यह कोई ऐसा रैंप नहीं था, जिसके दोनों ओर चमकदार रोशनी हो, न ही वहां डिजाइनर कपड़े पहनकर चलने वाली मॉडलों की भीड़ थी। प्रीति का रैंप कभी घर के सामने की गली बनती, तो कभी ऊबड़-खाबड़ सड़क। आसपास लोगों का आना-जाना जारी रहता, लेकिन उनके कदम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
मां की साड़ी से तैयार होते थे डिजाइनर कपड़े, छोटी बहन बनी सबसे बड़ी ताकत!
प्रीति की संघर्षगाथा में उनकी छोटी बहन का योगदान भी बेहद खास है। महंगे डिजाइनर कपड़े खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन नए-नए डिजाइन तैयार करने की कल्पनाशक्ति भरपूर थी।

ऐसे में उनकी छोटी बहन ने मां की साड़ियों को काटकर और सिलाई मशीन की मदद से नए डिजाइन के कपड़े तैयार करने शुरू किए। रातभर मेहनत करके बनाए गए कपड़ों को पहनकर प्रीति सुबह अपनी रैंप वॉक की रील तैयार करतीं और फिर उसे सोशल मीडिया पर साझा कर देतीं।
यह केवल कपड़ों की डिजाइनिंग नहीं थी, बल्कि सीमित संसाधनों में बड़े सपने को आकार देने की कोशिश थी। एक बहन के हाथों में सुई-धागा था, तो दूसरी के कदमों में मंजिल तक पहुंचने का जुनून। दोनों ने मिलकर अभावों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मकता की ताकत बना लिया।

जहां कुछ लोग महंगे कैमरे, बड़े स्टूडियो और शानदार लोकेशन के बिना एक कदम आगे बढ़ाने से पहले कई बार सोचते हैं, वहीं प्रीति ने अपनी छोटी-सी दुनिया को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
मजाक उड़ाने वालों के बीच जारी रही कोशिश, फिर दुनिया तक पहुंचा हुनर!
प्रीति की शुरुआती रील्स पर लोगों ने तरह-तरह की टिप्पणियां कीं। कुछ ने उनके सपनों का मजाक उड़ाया, तो कुछ ने उनकी शक्ल-सूरत को लेकर अपमानजनक बातें कहीं। किसी ने उन्हें ‘काली बिल्ली’ कहकर चिढ़ाया, तो किसी ने तंज कसते हुए कहा कि वह मॉडल कैसे बन सकती हैं।

लेकिन प्रीति ने लोगों की टिप्पणियों को अपनी मंजिल का फैसला नहीं बनने दिया। उन्होंने आलोचनाओं के जवाब में बहस करने के बजाय अपने काम को जारी रखा।
धीरे-धीरे उनके रैंप वॉक वीडियो लोगों का ध्यान खींचने लगे। उनके अनोखे अंदाज, आत्मविश्वास और सीमित संसाधनों में तैयार किए गए डिजाइन ने सोशल मीडिया पर पहचान बनानी शुरू की। उनकी प्रतिभा की चर्चा दूर-दूर तक पहुंची और बीबीसी तक उनकी कहानी पहुंचने के बाद उन्हें व्यापक पहचान मिली।

इसके बाद प्रीति के लिए मॉडलिंग की दुनिया में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलने लगे। उनकी कहानी इस बात की मिसाल बन गई कि प्रतिभा को हमेशा महंगे मंच की जरूरत नहीं होती। कई बार एक छोटा-सा कमरा, एक साधारण मोबाइल और कुछ कर गुजरने का जुनून भी बड़े बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं।
महंगे मॉडलिंग स्कूलों के दौर में प्रीति का संघर्ष एक बड़ा संदेश!
आज मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के लिए बड़े-बड़े संस्थान, महंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम और आकर्षक सुविधाएं उपलब्ध हैं। बहुत से युवा इन सुविधाओं का लाभ उठाने के बावजूद अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते हैं। वहीं प्रीति ने सीमित साधनों के बीच अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया और आगे बढ़ने का रास्ता बनाया।

उनकी कहानी का अर्थ यह नहीं कि प्रशिक्षण या संसाधनों की कोई जरूरत नहीं होती। बल्कि इसका संदेश यह है कि संसाधनों की कमी को अपने सपनों का अंत मान लेना सबसे बड़ी बाधा बन सकता है।
प्रीति ने साबित किया कि अगर इंसान अपने पास मौजूद साधनों का सही इस्तेमाल करे, लगातार सीखता रहे और असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे रास्ता निकाले, तो छोटी शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुंचने का माध्यम बन सकती है।

जिस बस्ती की तंग गलियों में उनके सपनों का मजाक उड़ाया गया, वहीं से निकली उनकी मेहनत की कहानी आज दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उनकी यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि किसी इंसान की पहचान उसके घर, कपड़ों या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास से होनी चाहिए।
बस्तर की माटी न्यूज़ की अपील—लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर अपने सपनों को मत मारिए!
बस्तर की माटी न्यूज़ उन सभी नौजवानों और युवतियों से अपील करता है, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी, पारिवारिक परिस्थितियों या समाज की आलोचनाओं के कारण कदम आगे बढ़ाने से डरते हैं।

याद रखिए, शुरुआत करने के लिए हर बार बड़े मंच की जरूरत नहीं होती। जरूरी है कि आप अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें, उपलब्ध संसाधनों से काम शुरू करें और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ते रहें।
अगर किसी साधारण परिवार की बेटी सीमित संसाधनों के बीच अपनी प्रतिभा को निखारकर अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों तक पहुंचने का रास्ता बना सकती है, तो देश के दूसरे युवा भी अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास क्यों नहीं कर सकते?

चाहे खेल का मैदान हो, शिक्षा का क्षेत्र, कला, पत्रकारिता, व्यवसाय, तकनीक या कोई अन्य पेशा—हर क्षेत्र में मेहनत, सीखने की इच्छा और निरंतर प्रयास की अहमियत होती है।
लोग शुरुआत में आपका मजाक उड़ा सकते हैं। आपकी कोशिशों को नकार सकते हैं। आपकी आर्थिक स्थिति देखकर आपकी क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। लेकिन दूसरों की सोच को अपने भविष्य का फैसला मत बनने दीजिए।
क्योंकि सपनों की ऊंचाई आपके घर की छत से नहीं, आपके हौसलों से तय होती है!
प्रीति प्रजापति की कहानी केवल एक लड़की के मॉडल बनने की कहानी नहीं है। यह उस सोच को चुनौती देने वाली कहानी है, जो मानती है कि सफलता केवल सुविधासंपन्न लोगों का अधिकार है।
यह कहानी बताती है कि अभावों में जन्म लेना आपकी गलती नहीं, लेकिन अभावों के कारण अपनी प्रतिभा को पहचानने से इनकार कर देना आपके सपनों को पीछे धकेल सकता है।
इसलिए उठिए, अपने हुनर को पहचानिए और आज से ही अपने सपनों की दिशा में पहला कदम बढ़ाइए। मंजिल तक पहुंचने में समय लग सकता है, रास्ते में मुश्किलें आ सकती हैं और कई बार असफलता भी मिल सकती है। लेकिन कोशिश जारी रहे, तो आगे बढ़ने के रास्ते निकल सकते हैं।

बस्तर की माटी न्यूज़ का संदेश साफ है—सपने देखने की आजादी सबको है और उन्हें पूरा करने की कोशिश करने का हक भी सबको है। अपनी परिस्थितियों को अपनी पहचान मत बनने दीजिए; अपने हौसले को अपनी पहचान बनाइए।

