मोबाइल ने छीनी कसरत, योग दिवस ने लौटाई सांसें! अमलीपदर में विकास और स्वास्थ्य की अनोखी जुगलबंदी ।
सिर्फ सड़क-नाली नहीं, अब योगासन भी बनवा रही हैं सरपंच! अमलीपदर में विकास ने बिछाई योग की चटाई”
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर ग्राम पंचायत अमलीपदर में ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसे देखकर लोगों ने कहा – “अब गांव में सिर्फ विकास ही नहीं, स्वास्थ्य का भी विकास हो रहा है।”
गांव की सरपंच हेमोबाई नागेश के नेतृत्व में आयोजित योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि अमलीपदर की सरपंच उन चुनिंदा जनप्रतिनिधियों में गिनी जा रही हैं जो केवल सड़क, नाली और भवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों को स्वस्थ रखने के लिए योग की चटाई भी बिछा रही हैं।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, युवाओं, पुलिस विभाग के जवानों, सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। उपस्थित प्रमुख लोगों में निर्भय सिंह ठाकुर, नवीन माझी, मुकेश साहू, पंकज माझी, भरत मिश्रा, भानु यादव, सुकदेव सॉरी, भानुप्रिया प्रधान, संगीता यादव, पिंकी सिन्हा, तुला माझी और लक्ष्मण माझी सहित अनेक ग्रामीण शामिल रहे।

योग प्रशिक्षकों ने लोगों को योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया और बताया कि शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और जीवन को संतुलित रखने के लिए योग कितना आवश्यक है। ग्रामीणों ने भी पूरे उत्साह के साथ योग किया और प्रतिदिन योग करने का संकल्प लिया।

भारत में योग हजारों वर्षों से ऋषि-मुनियों की देन रहा है। सदियों तक यह ज्ञान हमारे आश्रमों और ग्रंथों में धूल फांकता रहा, लेकिन जब विदेशों ने इसे अपनाना शुरू किया तो हमें भी याद आया कि अरे! यह तो हमारी ही विरासत है।
कभी गांव में लोग सुबह खेत की ओर जाते हुए अनजाने में जितने आसन कर लेते थे, उतने आजकल योग शिविर में सीखने पड़ रहे हैं। पहले हल चलाना और लकड़ी काटना ही फिटनेस का मंत्र था, अब मोबाइल और मोटरसाइकिल के दौर में योग की जरूरत महसूस होने लगी है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उनके प्रयासों से योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और आज दुनिया के अनेक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। लोगों को यह भी बताया गया कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि यह वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है और भारतीय परंपरा में इसका विशेष महत्व है।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जिस तरह गांव में विकास कार्य जरूरी हैं, उसी तरह स्वस्थ शरीर भी जरूरी है। क्योंकि सड़क बन जाए, भवन बन जाए, लेकिन अगर शरीर ही साथ न दे तो विकास का आनंद कौन उठाएगा?
फिलहाल अमलीपदर में संदेश साफ है – गांव में विकास की गाड़ी भी दौड़ेगी और योग की सांसें भी चलती रहेंगी।

