साइबर जागरूकता अभियान

लापरवाही, डर और लालच—साइबर ठगों के तीन हथियार, अमलीपदर में भाइयों की कलाई पर बंधी ‘जागरूकता की राखी’

साइबर ठगों की दुनिया में न कोई दरवाजा है, न कोई ताला… बस एक लिंक चाहिए और आपकी जेब का रास्ता उनके मोबाइल तक खुल सकता है। कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी पुलिस अफसर बनकर और कभी फर्जी साइबर थाना बनाकर ठग लोगों को डराते हैं।
इसी खतरे को लेकर अमलीपदर थाना क्षेत्र में साइबर जागरूकता अभियान चलाया गया, जहां पुलिस ने लोगों को समझाया कि साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि लापरवाही, डर और लालच है।

कार्यक्रम में अमलीपदर थाना प्रभारी विजय कुमार ध्रुव ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए।
उन्होंने खास तौर पर APK लिंक से सावधान रहने की हिदायत दी। बताया गया कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले बेहद सतर्क रहें और यदि किसी लिंक के आखिर में “.APK” लिखा दिखाई दे तो उसे डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें।

पुलिस ने साफ कहा—
OTP किसी को नहीं देना है।
क्योंकि OTP साझा करना कई मामलों में आपके खाते या डिजिटल सेवा तक अनधिकृत पहुंच का रास्ता खोल सकता है।

साइबर ठगों का एक नया हथकंडा है—फर्जी पुलिस और फर्जी साइबर थाना।
वीडियो कॉल पर एक साथ कई लोग पुलिसकर्मी बनकर बैठते हैं। कोई खुद को हवलदार बताता है, कोई इंस्पेक्टर तो कोई साइबर क्राइम का SP। फिर शुरू होता है डर का खेल—किसी अवैध काम का हवाला, गिरफ्तारी की धमकी और यहां तक कि ‘हाउस अरेस्ट’ करने की बात।
मतलब ठगों ने मोबाइल स्क्रीन को ही थाना बना लिया और वीडियो कॉल को अपनी अदालत!
थाना प्रभारी ने लोगों को समझाया कि ऐसे मामलों में डरने के बजाय शांत रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंक संबंधी जानकारी या संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

साइबर ठगी होने पर समय गंवाना भी नुकसान बढ़ा सकता है। पुलिस ने लोगों को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल कॉल कर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।
यानी ठग के खाते में पैसा पहुंचा नहीं कि शिकायत की घंटी बजा दीजिए—1930 पर तुरंत कॉल कीजिए।
अमलीपदर में साइबर जागरूकता अभियान का सबसे दिलचस्प संदेश रहा राखी के जरिए जागरूकता की सौगंध। कार्यक्रम के अंतिम चरण में साइबर जागरूकता अभियान से जुड़ी महिला जनप्रतिनिधियों ने मौजूद जनप्रतिनिधियों और भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और साइबर ठगी से बचने का संकल्प दिलाया।
और साथ में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों के हाथों पर भी राखी बांधी ।

बहनों ने भाइयों की कलाई पर सिर्फ धागा नहीं बांधा, बल्कि साइबर सुरक्षा का संदेश भी बांधा—
न APK लिंक पर जाएंगे,
न OTP बताएंगे,
न डरेंगे,
न लालच में आएंगे,
और साइबर ठगी का हिस्सा नहीं बनेंगे।
कार्यक्रम में अमलीपदर थाना क्षेत्र के सरपंच, बीडीसी सदस्य, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और क्षेत्रीय पत्रकार मौजूद रहे।
कार्यक्रम में निर्भय सिंह ठाकुर, हेमो बाई नागेश, हलमन ध्रुवा,हेमलाल ध्रुव, पुरुषोत्तम सोम, जयराम नागेश, ध्रुव सिंह ओटी, पिंकी साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
साइबर ठग रोज नए तरीके खोज रहे हैं… लेकिन बचाव का तरीका आज भी बेहद सीधा है—सतर्क रहिए, डरिए मत, लालच में मत आइए और OTP किसी को मत बताइए।
क्योंकि आज के डिजिटल जमाने में राखी सिर्फ कलाई की सुरक्षा का वादा नहीं…
मोबाइल और बैंक खाते की सुरक्षा का संकल्प भी बन सकती है।

