स्टिंग एनर्जी का कमाल या बिजली का धमाल? मिथिलेश की मौत पर उठे बड़े सवाल
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS)गरियाबंद
केगरियाबंद जिले के गोहरा पदर इलाके में मिथिलेश की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सवालों की ऐसी पहेली बन गई है, जिसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से ही सामने आएगा।
आखिरी श्रावण सोमवार और दंड-बम यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए नीम की पत्तियां तोड़ने गए मिथिलेश की अचानक मौत हो गई।
लेकिन मौत कैसे हुई?

यहीं से शुरू होती है कहानी में ‘करंट’ वाली एंट्री।
परिजन के मुताबिक_ एक तरफ मिथिलेश के दोस्तों ने बताया कि स्टिंग एनर्जी पीने के बाद उल्टी हो रहा है और मिथिलेश बेहोश हो गया है उसे इलाज करना है आप जल्दी आईए । वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर ने मिथिलेश के परिवार को कहा कि मौत करंट लगने से हुआ है । परिवार वालों का घटना के विषय पर इसीलिए शक हो ररहा एहै कि,अगर बिजली के तार की चपेट में आने की आशंका थी और पेड़ से गिर गया था तो दोस्तों ने डॉक्टरों को और परिवार वालों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी
मिथिलेश के चाचा सुभाष यादव का आरोप है कि घटना की सही जानकारी उनके दोस्तों के द्वारा समय पर नहीं दी गई। इसलिए उसकी मौत हो गया
अगर डॉक्टरों को बताया जाता कि मिथिलेश संभवतः बिजली के संपर्क में आया है या पेड़ से गिरने के पीछे बिजली का कोई कनेक्शन हो सकता है, तो इलाज की दिशा शायद अलग होती।
यानी सवाल सिर्फ मौत का नहीं है…
सवाल यह भी है कि डॉक्टर तक पहुंची जानकारी कितनी पूरी थी और कितनी अधूरी?
लेकिन दूसरी तरफ मिथिलेश के दोस्त युवराज प्रधान की बात कुछ अलग है।

युवराज के मुताबिक पहले सभी दोस्तों ने मिठाई खाई और पानी पिया। इसके बाद मिथिलेश नीम की पत्तियां तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ गया।
दोस्त नीचे खड़े होकर पत्तियां इकट्ठा कर रहे थे।
इसी दौरान मिथिलेश पेड़ से नीचे गिर गया।
युवराज का कहना है कि परिवार को घटना की जानकारी दी गई थी और उल्टी होने की बात भी बताई गई, लेकिन पेड़ से गिरने की बात फोन पर हड़बड़ी में नहीं बताई जा सकी।
अब यहां कहानी में एक और सवाल खड़ा हो गया—
अगर स्टिंग एनर्जी पीना महत्वपूर्ण तथ्य था, तो वह डॉक्टर तक क्यों नहीं पहुंचा?
और अगर बिजली का करंट लगा था और पेड़ से गिरने का बात की जानकारी भी समय पर क्यों नहीं दी गई?
अब जरा स्टिंग एनर्जी के विज्ञापन वाली दुनिया में चलते हैं…
विज्ञापन में बोतल खुलती है—ऊर्जा आती है…बंदा दौड़ता है…
काम फटाफट होता है…मानो ऐसा की पांच लोगों का काम एक आदमी या फिर असंभव सा दिखने वाले काम चंद सेकंड में करने का क्षमता स्टिंग पीने वाले आदमी रखते हैं जिसको स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स के विज्ञापन में दिखाया जाता है
लेकिन गोहरा पदर की इस कहानी में सवाल यह है कि कहीं ‘एनर्जी’ की कहानी इतनी ज्यादा ऊर्जावान तो नहीं हो गई कि मामला सीधे बिजली विभाग तक पहुंच गया?
स्टिंग पीने से शरीर में करंट पैदा हुआ था?
या फिर पेड़ के ऊपर पहले से मौजूद हाई-वोल्टेज तार ही असली विलेन था?
या फिर मिथिलेश की मौत का कारण कुछ और था, जिसे अभी तक पूरी तरह सामने नहीं लाया गया?
सवाल बहुत हैं…
लेकिन जवाब फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पन्नों में बंद है।
और जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक ‘स्टिंग’ को मौत का कारण बताना सिर्फ कयास होगा।
हां, सोशल मीडिया और लोगों की चर्चा में तो अब मजाक भी चल पड़ा है—
मिथिलेश के मौत का कारण अगर बिजली के चपेट में आना और अगर स्टिंग पीने से शरीर में सच मुच बिजली पैदा होने लगी तो आने वाले दिनों में बिजली विभाग ट्रांसफॉर्मर लगाने के बजाय स्टिंग की बोतलें गिनेगा!
लेकिन मजाक अपनी जगह…मौत अपनी जगह।

मिथिलेश के परिवार का कहना है कि डॉक्टर के कहने के हिसाब से अगर मिथिलेश का मौत करंट लगने से हुआ है तो फिर भी मिथिलेश की मौत को लेकर परिवार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या सामने आता है।
क्या मिथिलेश हाई-वोल्टेज तार की चपेट में आया?
क्या पेड़ से गिरना ही मौत की वजह बना?
मौत के पहले खाए हुए मिठाई हीं मौत की वजह ?
क्या उल्टी और बेहोशी के पीछे कोई चिकित्सकीय कारण था?
या घटना से जुड़ी कोई और महत्वपूर्ण कड़ी अभी जांच से बाहर है?

इन सभी सवालों का जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल ‘स्टिंग एनर्जी’ से लेकर हाई-वोल्टेज बिजली तक, हर एंगल चर्चा में है…
लेकिन असली करंट कहां था—
फिलहाल कहानी में—
मिठाई है,
स्टिंग है,
नीम का पेड़ है,
नीम की पत्तियां हैं,
हाई-वोल्टेज तार है,
और सबसे बड़ा सवाल है—मौत का कारण क्या है?
हकीकत का फैसला पोस्टमार्टम, वैज्ञानिक जांच और पुलिस की निष्पक्ष जांच ही करेगी।
क्योंकि मिथिलेश की मौत कोई विज्ञापन नहीं…
जहां बोतल खुली और जवाब मिल गया।
यह एक परिवार का दर्द है।
और इस दर्द का जवाब—
स्टिंग की बोतल नहीं, जांच की रिपोर्ट देगी।

