साइकिल मिली… अब सड़क का इंतजार! मुड़गेल माल में 26 बालिकाओं को मिली सरस्वती साइकिल, लेकिन कीचड़ भरी राह ने पूछ लिया—स्कूल तक पहुंचोगी कैसे?
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद
आज शिक्षक दिवस है…
यानी वह दिन, जब गुरु को सम्मान दिया जाता है और शिक्षा के मंदिरों में भविष्य की तस्वीर दिखाई जाती है।
इसी मौके पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुड़गेलमाल में भी खूब उत्साह नजर आया।
सरस्वती साइकिल योजना के तहत 26 बालिकाओं को निशुल्क साइकिल वितरित की गई।
मंच सजा…
अतिथि पहुंचे…
तालियां बजीं…
साइकिलें बांटी गईं…
और बच्चियों के चेहरों पर मुस्कान भी नजर आई।
लेकिन इसी मुस्कान के पीछे एक सवाल भी खड़ा है—
साइकिल तो मिल गई साहब… अब इसे चलाएंगे कहां?
क्योंकि सरकार ने बच्चियों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए साइकिल दे दी है,
लेकिन मुड़गेल माल से लगे अन्य पंचायत से मूडगेल माल की तरफ आने वाली सड़कें अगर बारिश में फिर कीचड़ में तब्दील हो गई,
तो सवाल यह है कि—
क्या साइकिल सड़क पर चलेगी या बच्चियां साइकिल को हाथ में लेकर चलेंगी?
सरकार कहती है—
बेटियां पढ़ेंगी, आगे बढ़ेंगी।
योजना कहती है—
साइकिल मिलेगी तो स्कूल पहुंचना आसान होगा।
लेकिन सड़क शायद कह रही है—
पहले मुझे पार करके तो दिखाओ!

बारिश में जब रास्ते कीचड़ से भर जाएं,
साइकिल के पहिए कीचड़ में धंस जाएं,
रास्ता फिसलन भरा हो जाए
और सामने स्कूल तक पहुंचने के लिए लंबा सफर हो…
तो क्या ये 26 बालिकाएं उसी रफ्तार से स्कूल पहुंच पाएंगी,
जिस रफ्तार से मंच से उन्हें साइकिलें बांटी गईं?
या फिर तस्वीर कुछ ऐसी होगी—
साइकिल हाथ में… जूते हाथ में…
और बच्चे कीचड़ में पैर जमाते हुए स्कूल की ओर रवाना?
साइकिल वितरण निश्चित रूप से एक अच्छी पहल है।
बच्चियों को स्कूल आने-जाने में सुविधा मिले,
शिक्षा से उनका जुड़ाव बढ़े—इससे अच्छी बात क्या होगी?

लेकिन सवाल योजना पर नहीं,
उस व्यवस्था पर है जो योजना को जमीन तक पहुंचाती है।
अगर बच्चियों को साइकिल दी जा रही है,
तो क्या उनके रास्ते भी साइकिल चलाने लायक बनाए जाएंगे?
क्योंकि साइकिल की कीमत सरकार ने चुका दी,
लेकिन सड़क की कीमत आखिर कौन चुकाएगा?
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत मैनपुर के सभापति निर्भय सिंह ठाकुर मौजूद रहे।
विशिष्ट अतिथि नवीन मांझी, कांदाडोंगर परिक्षेत्र मंडल अध्यक्ष रहे।
इसके अलावा शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष रूपाधर ध्रुवा, सरपंच केशरी सिंह नागेश, फूलसिंह ध्रुवा, पुरीत राम ध्रुवा, कुस्टो राम प्रधान, तिलक चंद्र ध्रुवा, टेकधर ध्रुवा पूर्व सरपंच, खुदेश्वर यादव, संतोष यादव, युवा नेता जयप्रकाश जगत, सचिव नीलांबर यादव सहित गांव के अभिभावक, माताएं और युवा साथी मौजूद रहे।
प्राचार्य संजय साहू सहित विद्यालय के शिक्षकगणों की मौजूदगी में कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
अतिथि साइकिल देकर खुश…
बच्चियां साइकिल पाकर खुश…
अभिभावक भी खुश…
लेकिन अब देखना यह है कि बारिश में सड़क खुश रहती है या नहीं!
क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू यही है—
सरकार ने बच्चियों के हाथ में साइकिल तो दे दी,
अब क्या प्रशासन उनके पहियों के नीचे सड़क भी देगा?
कहीं ऐसा न हो कि
‘सरस्वती साइकिल योजना’ की साइकिल स्कूल पहुंचाने के बजाय
कीचड़ में रास्ता खोजती रह जाए।
और आखिर में सवाल सिर्फ 26 साइकिलों का नहीं है…
सवाल है उन तमाम बच्चों का,
जो रोज इसी रास्ते से शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
अगर रास्ता ही शिक्षा तक पहुंचने में बाधा बन जाए,
तो फिर साइकिल कितनी भी चमकदार क्यों न हो…
मंजिल तक पहुंचना मुश्किल ही रहेगा।
कैमरा चाहे साइकिल की चमक दिखाए,
लेकिन जिम्मेदारों को अब सड़क की हालत भी दिखानी होगी।
साइकिल दे दीजिए…
लेकिन बच्चियों को सड़क पर चलने का रास्ता भी दीजिए।
क्योंकि—
“साइकिल से स्कूल तक पहुंचने का सपना तभी पूरा होगा, जब सड़क भी बच्चियों का साथ देगी।”

