राजीव लोचन
छत्तीसगढ़ के अमलीपदर से, जहां कांडशर जंगल में भीषण आग लग गई है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं, लेकिन यह आग प्राकृतिक है या किसी के द्वारा लगाई गई है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

कांडशर जंगल में जहाँ आग तेजी से फैल रही है। इस आग से जंगल में रहने वाले छोटे-छोटे जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुँचा है। आग के कारण कई पेड़ जलकर राख हो गए हैं, और जंगल में रहने वाले जीव-जंतुओं की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय निवासी डमरू का बयान:
“हर साल फरबरी _मार्च में जंगल में आग लगती है। कई समय लोग खुद ही आग लगा देते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है कर को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।”
यह जंगल में आग लगने की घटनाएँ न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि जैव विविधता को भी खतरे में डालती हैं। सरकार और प्रशासन को इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। आम जनता को भी जागरूक होकर जंगलों को बचाने में अपना योगदान देना चाहिए।


