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वन दिवस पर वनों की दुर्दशा: आग, अवैध कटाई और वन विभाग की नाकामी
बुडगेल टप्पा रेंज, 21 मार्च: जहां एक ओर पूरे देश में वन संरक्षण के उद्देश्य से वन दिवस मनाया जा रहा था, वहीं छत्तीसगढ़ के बुडगेल टप्पा रेंज के जंगलों की भयावह स्थिति ने इस दिवस के महत्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया। जंगलों में भयानक आग लगी, सैकड़ों पेड़ कटे और वन विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई।

जंगल में भीषण आग, पुलिस ने बुझाई, वन विभाग रहा नाकाम
बुडगेल टप्पा रेंज के क्षेत्र क्रमांक 1229 में इंदागांव थाना के सामने अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि अगर यह सड़क पार कर जाती, तो आसपास के इलाकों में भारी तबाही मच सकती थी क्योंकि इस पार इंदा गांव का थाना मौजूद है ।

आश्चर्य की बात यह रही कि वन विभाग की टीम समय पर नहीं पहुंची, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला। वे बाल्टियों में पानी भर-भरकर आग बुझाने में जुट गए और कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया। यह सवाल उठता है कि जब जंगलों की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट सर्विलांस और अत्याधुनिक कैमरों का दावा किया जाता है, तो इतनी बड़ी आग लगने के बावजूद वन विभाग क्यों देरी से पहुंचा ?
8 हेक्टेयर जंगल जलकर राख, वन्यजीवों को भारी नुकसान

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह सामने आया कि करीब 8 हेक्टेयर जंगल पूरी तरह जल चुका है। कई कीमती वृक्ष नष्ट हो गए और छोटे जीव-जंतुओं को भी भारी नुकसान हुआ। यह केवल पर्यावरणीय क्षति नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी है।

अवैध लकड़ी तस्करी जोरों पर, वन विभाग बेखबर

जब हम जंगल के भीतर पहुंचे, तो स्थिति और भयावह नजर आई। थाने से मात्र 50 मीटर की दूरी पर कीमती सराई के पेड़ कुलाढ़ी से काट दिए गए थे। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, जो सैटेलाइट निगरानी के दावे करता है, थाने से कुछ कदमों की दूरी पर ही तस्करों ने कटाई कर दी थी। यह स्पष्ट करता है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

150 से अधिक पेड़ काटे गए, लकड़ी चोरी के बाद लगाई गई आग?

जंगल के भीतर निरीक्षण करने पर पाया गया कि NH 130C से 10-15 मीटर की दूरी पर करीब 100-150 पेड़ काटे जा चुके थे। कटे हुए पेड़ों के अवशेषों को जलाने के निशान भी मिले। यह संकेत देता है कि आग प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि यह तस्करों द्वारा अपने सबूत मिटाने की साजिश हो सकता है ।

वन विभाग की नर्सरी भी अव्यवस्था का शिकार
वन विभाग द्वारा वन संरक्षण के लिए धुर्वागुड़ी में एक नर्सरी स्थापित की गई है, जहां नए पौधे तैयार किए जाते हैं। लेकिन वहां की स्थिति भी बदहाल है—कई पौधे पानी और देखभाल के अभाव में नष्ट हो चुके है । कर्मचारियों के लिए न तो उचित रहने की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 15 महीने पहले इसी नर्सरी के दक्षिण दिशा के पुराने कुआं के पास बहुमूल्य सराई के पेड़ के कुछ लठ गड्ढे में छिपाए गए थे और कुछ बाहर छोड़ दिया गया था । जब यह मामला एक पत्रकार के सामने आया, तो RTI डालने के बाद इसका खुलासा हुआ। बाद में कुछ लोगों पर ₹26,000 का जुर्माना भी लगाया गया था और एक बीट गार्ड को सस्पेंड कर दिया गया था।

यह घटना साबित करती है कि चोरों के हौसले कितने बुलंद हैं कि वे सरकारी नर्सरी के अंदर ही बहुमूल्य लकड़ियां छुपा सकते हैं, जहां बन कर्मी तैनात हो । इससे वन विभाग की ईमानदारी और निगरानी पर गंभीर संदेह खड़ा होता है।

आग: प्राकृतिक आपदा या सोची-समझी साजिश?

इस साल जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लेकिन यह साफ नहीं हो पा रहा कि यह प्राकृतिक कारणों से लगी है या यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।
वन विभाग को इसकी गहन जांच करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि तस्करों की साजिशों पर तत्काल रोक लगे।

वन दिवस का संदेश: केवल जागरूकता नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी
वन दिवस का उद्देश्य जंगलों के प्रति लोगों को जागरूक करना और संरक्षण को बढ़ावा देना है। लेकिन इस दिन जंगलों की ऐसी दुर्दशा देखना बेहद चिंताजनक है।

सरकार और वन विभाग को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
- वन कर्मियों को अधिक सतर्क रहना होगा।
- आग की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।
- लकड़ी तस्करों के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे।
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में हमारे जंगल सिर्फ कागजों पर सुरक्षित रह जाएंगे और वास्तविकता में केवल राख बनकर रह जाएंगे।