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छत्तीसगढ़: फर्जी आदिवासी जाति प्रमाणपत्र बनाकर नौकरी करने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, वन विभाग पर संरक्षण देने के आरोप

घनश्याम यादव

रायपुर/बीजापुर,बस्तर के माटी समाचार 25 अप्रैल 2024 छत्तीसगढ़ के वन विभाग में एक कर्मचारी द्वारा फर्जी आदिवासी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। शिव शंकर शाह नामक इस कर्मचारी का जाति प्रमाणपत्र जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति, बजापुर द्वारा फर्जी पाया गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि राज्य सरकार ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 

फर्जी प्रमाणपत्र का मामला
शिव शंकर शाह ने खुद को आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) बताकर वन विभाग में नौकरी प्राप्त की थी। हालांकि, जांच में पाया गया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के भांगड़ापर निवासी कानवासी समुदाय से ताल्लुक रखता है, जो अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में नहीं आता। छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 24 जुलाई 2021 को जारी आदेश (क्रमांक: एफ13-16/20215/आ प्रा/1-3) के अनुसार, झूठे जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 25 अप्रैल 2024 को शिव शंकर शाह को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया, लेकिन वन विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

पहले भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं
इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि शिव शंकर शाह के भाई राजू प्रसाद शाह, जो पटवारी के पद पर तैनात थे, उन्हें भी फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी शिव शंकर शाह को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। 

आरोप: वन अधिकारियों का संरक्षण
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि वन मंडल अधिकारी शिव शंकर शाह को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए। इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। 

सरकार की कार्रवाई का इंतजार
अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं। यदि शिव शंकर शाह के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला सरकारी विभागों में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की एक बड़ी कमजोरी के रूप में उजागर होगा। 

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