एक ही शौचालय में कई लोगों की तस्वीरें, स्वच्छ भारत मिशन में बड़ा घोटाला: नकली शौचालयों पर बंटी करोड़ों की राशि, अधिकारी भी आरोपों के घेरे में, जिम्मेदार मीडिया से बचने बयान देने से भी बच रहे
घनश्याम यादव प्रधान संपादक बस्तर के माटी समाचार
बीजापुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बीजापुर जिले के एक पंचायत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले सामने आए हैं। भोपालपटनम जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रुद्रारम में शौचालय निर्माण में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फेस 2 में जिन शौचालय को जिओ टैग कर स्वच्छ भारत मिशन वेबसाइट पर अपलोड किया गया है पूरी तरह फर्जी है। भोपालपटनम जनपद के कई पंचायतों में शौचालय निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। जिसमें कई लोगों के शामिल होने के अंदेशा है।जब हमने रुद्रारम ग्राम पंचायत में देखा तो
एक ही शौचालय में एक ही परिवार के लोगों का फोटो अपलोड कर अलग-अलग हितग्राहियों के नाम से राशि आहरण कर स्वचछ भारत मिशन योजना राशि में हेराफेरी की गई।
ऑनलाइन सिस्टम में दिखाए गये शौचालय केवल कागजों पर बनाए गए हैं धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों की मिलीभगत ऐसी है कि शासकीय कर्मचारियों तक ने अपने नाम पर शौचालय स्वीकृत करवाकर योजना का अनुचित लाभ उठाया। हैरत की बात तो यह है कि ब्लॉक समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) वेंकटेश के नाम पर भी एक शौचालय स्वीकृत पाया गया, जिसे बाद में निरस्त करने की बात कही गई। लेकिन वास्तविकता इससे परे है। इनकी बैंक खाते की जांच कराने पर दुध का दुध और पानी का पानी हो जाएगा
इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं। बस्तर के माटी समाचार पत्र के संपादक घनश्याम यादवक्षएवं हर खबर की बस्तर ब्यूरो सन्नू हेमला ब्लॉक कोऑर्डिनेटर वेंकटेश से इस मामले पर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। उनका यह रवैया योजना में हुई गड़बड़ियों पर से शक की सुई और भी ज्यादा पुख्ता करता है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में तभी अंतरित की जाती है जब उस शौचालय का जियो-टैगिंग (स्थान की पहचान) और भौतिक सत्यापन पूरा हो जाता है। यानी की सारे हितग्राहियों के फोटो अपलोड कर बताया जाता है कि सारे शौचालय पूर्ण हो चके हैं इस मामले में, ऐसा प्रतीत होता है कि सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया गया या जानबूझकर इसमें लापरवाही बरती गई। जिसके चलते पात्र हितग्राहियों को शौचालय का लाभ नहीं मिला और रोजगार सहायक ने अपने घर मे दो शौचालय बनवा लिए। रोजगार सहायक की माँ ने बताया कि मेरे और मेरे बेटे के नाम पर दो शौचालय बने हैं जबकि उस बिल्डिंग पर सभी परिवार संयुक्त रुप से रहते हैं। रोजगार सहायक ने जानबूझकर अलग अलग हितग्राहियों के नाम का आधार कार्ड के जरिए अपने ही भैया भाभी और माँ तथा स्वयं का फोटो अपलोड कर स्वच्छ भारत मिशन योजना को विफल किया है जिससे वास्तविक हितग्राही को स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत मिलने वाला शौचालय का लाभ नही मिला।
जब ब्लाक कोआर्डिनेटर वेंकटेश इल्लाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि शौचालय का जियो टैगिंग पंचायत सचिव और रोजगार सहायक करते है जब पंचायत सचिव कोरम विजय से पूछा गया तो उसने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शौचालय निर्माण की जिओ टैगिंग ब्लाक कोआर्डिनेटर द्वारा ही किया जाता है
अब समझ नही आता कि कौन सच बोल रहा और कौन झूठ बोल रहा है जब पोल खुलने लगी तो सबकी जुबान पर ताले लग गये हैं।
गई

रुद्रारम पंचायत में सामने आया यह मामला स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यह घटना सवाल खड़ा करती है कि आखिर जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच पा रहा है या फिर कुछ अधिकारियों और गलत हाथों में यह केवल भ्रष्टाचार का एक नया जरिया बन कर रह गया है। इस मामले की गहन जांच की जरूरत है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।
इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत भोपालपटनम से मिलकर चर्चा की तो उन्होंने जांच कराने की बात कही किन्तु स्वच्छ भारत मिशन के ब्लाक कोआर्डिनेटर डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर कोई भी बयान देने से साफ इंकार कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार पर कोई भी कुछ भी कहने को तैयार नही हैं।

इस संबंध में स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार की कोई सीमा नही है। एक तरफ सुशासन की सरकार और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का नारा और दूसरी तरफ भाजपा सरकार भ्रष्टाचारियों को बढावा देने तथा बचाने का काम कर रही है मेरी सरकार से मांग है कि जो भी अधिकारी कर्मचारी इसमें संलिप्त हैं उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो।
अब देखना यहां होगा कि स्थानीय विधायक की मांग को जिला प्रशासन और सरकार में लेती है या भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर मामले को ठंडा बस्ती में जाने दिया जाता है देखना होगा

