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बस्तर के माटी

कृष्ण कुमार कुंजाम ब्यूरो 

 *अनुसूचित क्षेत्र बस्तर में ‘पंडुम’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति* 

छत्तीसगढ़ सरकार अनुसूचित क्षेत्र बस्तर में प्रस्तावित व आयोजित किए जा रहे विभिन्न सरकारी/प्रायोजित कार्यक्रमों में ‘पंडुम’ शब्द के प्रयोग पर राजू सोढ़ी ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि ‘पंडुम’ आदिवासी समाज की विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक आस्था, देव-पेन परंपरा और रीति-रिवाजों से जुड़ा पवित्र शब्द है, जिसका प्रयोग प्रशासनिक या औपचारिक आयोजनों में बिना समुदाय की सहमति के किया जाना आदिवासी आस्था का उल्लंघन है।

सोढ़ी ने कहा कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 29 (संस्कृति की रक्षा) के तहत आदिवासी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा राज्य का दायित्व है। ऐसे में ‘पंडुम’ जैसे पवित्र शब्द का असंगत प्रयोग न केवल संवैधानिक भावना के विपरीत है, बल्कि इससे स्थानीय आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचती है।

उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से ‘पंडुम’ शब्द को सभी प्रस्तावित/आयोजित कार्यक्रमों के नाम व प्रचार सामग्री से हटाने, तथा भविष्य में आदिवासी धार्मिक-सांस्कृतिक शब्दों के प्रयोग से पूर्व स्थानीय ग्राम सभा/समुदाय की सहमति सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, बस्तर की आदिवासी परंपराओं, देव-पेन संस्कृति और आस्थाओं की संवैधानिक व व्यावहारिक सुरक्षा हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह किया।

सोढ़ी ने चेतावनी दी कि यदि इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आदिवासी समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगा।

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