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हेलीकॉप्टर से हाजिरी या शक्तिमान के शक्ति? हैदराबाद–उड़ीसा से रोज़ सागड़ा पहुंच रहे मजदूर! सगड़ा में मनरेगा का “सुपरमैन मॉडल”उजागर ।

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद

महात्मा गांधी के नाम से चल रही मनरेगा योजना अब सागड़ा ग्राम पंचायत में किसी “सुपरपावर स्कीम” में तब्दील होती नजर आ रही है। यहां मजदूरी अब सिर्फ फावड़े और कुदाल से नहीं, बल्कि कागज़ों पर उड़ान भरकर हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सागड़ा पंचायत में डाबरी खनन और मेड़बंदी जैसे कार्यों में ऐसे मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई है, जो वास्तव में या तो हैदराबाद में रोज़गार कर रहे हैं, या उड़ीसा में केनाल खनन में जुटे हुए हैं, या फिर कार्यस्थल पर कभी पहुंचे ही नहीं।
हैरानी की बात यह है कि मास्टर रोल में मनकैबाई, प्रभुलाल, डिगलेश, भीखलाल, चारोबाई, चंद्रिका, हिरासन, नीलेंद्री, ममिता खिरसिदुंर, प्रेमलाल, नूरपति, पुस्तम, रूपरेखा, थकित, जामवंती, उधव, नवीना, समिता, मुकेश, निराशों जैसे नाम बाकायदा दर्ज हैं, जबकि ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि ये मजदूर कभी काम करने गए ही नहीं थे। इसके बावजूद हाजिरी पूरी, मजदूरी पूरी और भुगतान भी पूरा दिखाया गया।
ग्रामीणों में चर्चा है कि 5 से 11 तारीख के बीच आशाबाई के डाबरी खनन और भानुमति, हेमलता व वेदराज के मेड़बंदी कार्यों में एक ही मजदूर का नाम एक ही दिन में चार _चार जगह दर्ज किया गया। सवाल यह है कि एक मजदूर एक दिन में चार-चार स्थानों पर कैसे काम कर सकता है? क्या अब मनरेगा में “डबल ड्यूटी” और “मल्टी लोकेशन वर्क” को भी मान्यता दे दी गई है?


लोग व्यंग्य में पूछ रहे हैं कि क्या सागड़ा पंचायत ने मजदूरों के लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा शुरू कर दी है, या फिर इन मजदूरों में शक्तिमान जैसी कोई अदृश्य शक्ति जाग गई है, जो हैदराबाद और उड़ीसा में रहकर भी सागड़ा में हाजिरी लगा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल फर्जी मास्टर रोल तैयार कर सरकारी राशि की बंदरबांट का साफ संकेत देता है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे मामलों में अब तक न रोजगार सहायक पर कार्रवाई हुई, न पंचायत कर्मियों की जवाबदेही तय की गई। हर बार योजना का नाम बदल जाता है, बोर्ड बदल जाते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार का तरीका वही पुराना बना रहता है। निगरानी तंत्र अगर कागज़ों तक ही सीमित रहेगा, तो मनरेगा जैसी योजनाएं मज़ाक बनकर रह जाएंगी।
इस मामले पर जब BKM न्यूज़ ने मैनपुर ब्लॉक के पीओ और सीईओ डी.एस. नागवंशी से बात की, तो दोनों अधिकारियों ने कहा कि मामले की जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यहीं एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—जहां सवाल उठ रहे हैं, सिर्फ वहीं जांच क्यों? क्या बाकी पंचायतों में इस तरह का भ्रष्टाचार नहीं हो रहा? क्या विभाग पूरे ब्लॉक या जिले में मनरेगा कार्यों की व्यापक जांच कराएगा?
फिलहाल सागड़ा के ग्रामीण निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘सुपरमैन मॉडल’ को सिर्फ एक पंचायत तक सीमित मानता है, या फिर पूरे सिस्टम की उड़ान की जांच करता है। BKM न्यूज़ इस पूरे मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई और प्रतिक्रिया का इंतजार करेगा।

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