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शराबखोरी: समाज की समस्या, सरकार द्वारा बढ़ावा

दंतेवाड़ा बस्तर के माटी समाचार-आदिवासी कार्यकर्ता एवं भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर राज्य में शराबखोरी की विकराल होती समस्या एवं इससे संबंधित सरकारी साजिश पर कड़ी टिप्पणी की है।
किसान नेता कहते हैं कि जिस प्रकार अंग्रेजों ने चाय की लत लगाकर देशवासियों को गुलामी की जंजीरों में बांध दिया, ठीक उसी प्रकार पूंजीपतियों ने सरकार के साथ सुनियोजित साजिश करके छत्तीसगढ़ राज्य को शराब के दलदल में धकेल कर बहुजन समाज को गुलाम बनाने का षड्यंत्र रचा है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई एवं हिंसक अपराधों जैसी सामाजिक समस्याओं से जूझ रही राज्य की जनता के सामने शराबखोरी की समस्या विकराल बन चुकी है। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकारों को अपने ही जनता के जीवन एवं भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। प्राकृतिक संसाधनों को निचोड़ कर दिशाहीन विकास का ढिंढोरा पीटने वाली सरकारों को अपने मानव संसाधनों की कोई परवाह ही नहीं है। वर्तमान में शराबखोरी घर-घर की समस्या बन चुकी है और हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर रही है। अस्पतालों, पुलिस थानों, कोर्ट-कचहरियों एवं नशा मुक्ति केंद्रों में जाकर शराब की विनाशलीला को समझा जा सकता है।
राज्य में नई शराब दुकानों को खोलने की नीति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की असंवेदनशीलता और पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली होने को दर्शाता है। किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री जनता के पिता की तरह होता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री बच्चे रूपी अपने ही जनता को शराब पिलाकर विनाश के दलदल में धकेल रहे हैं। आज आवश्यकता है कि राज्य में नये स्कूल, अस्पताल, सड़क, तालाब एवं सिंचाई परियोजनाओं जैसे जनकल्याणकारी संस्थान खोले जाएं ना कि शराब दुकानें। नई शराब दुकानों को खोलकर उसके माध्यम से बाहर प्रदेश के असामाजिक एवं शोषणकारी तत्वों को राज्य में सरकार द्वारा ही शरण दिया जाएगा जिसका खामियाजा राज्य की भोली-भाली जनता भुगतेगी। आरक्षित सीटों से चुने गये जनप्रतिनिधियों के मुंह में तो ताले ही लग चुके हैं जो तब खुलेंगे जब उन्हें इन शराब दुकानों से मुफ्त की शराब मिलेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य शराब बेचकर अपने खजाने को भरना तथा बहुजन समाज को शराब पिलाकर अपने हक एवं अधिकारों की लड़ाई से विचलित करना है।
भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शराबखोरी को बढ़ावा देने की नीति का प्रबल विरोध करता है एवं शराब दुकानों की संख्या को शून्यता की ओर ले जाने का समर्थन करता है। राज्य के बहुजन समाज विशेषकर महिलाओं से निवेदन है कि वो शराब खोरी की समस्या के विरुद्ध पूरी ताकत के साथ सामने आए। भारतीय किसान यूनियन आदिवासी मुख्यमंत्री को यह चेतावनी भी देता है की पूंजीपतियों के बहकावे में आकर ऐसा कोई कदम ना उठाये जिससे राज्य की जनता का नुकसान हो अन्यथा जनता राज्यव्यापी उग्र आंदोलन के लिए तैयार है।

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