“नारी शक्ति या राजनीतिक शक्ति? बिल पास कम, पासा ज्यादा!”
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS)गरियाबंद
देश में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” यानी संविधान का 106वां संशोधन—कागज़ पर महिलाओं को 33% आरक्षण देने का वादा करता है… लेकिन ज़मीनी हकीकत में ये आरक्षण अभी भी जनगणना और परिसीमन की फाइलों में ‘आरक्षित’ है।
उधर राजनीति की रसोई में इस बिल का तड़का कुछ ज्यादा ही तेज हो गया है।

आज अमलीपदर में कांदा डोंगर मंडल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन कर दिया। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन राजनीति की आग इतनी तेज थी कि पुतला भी जला… और माहौल भी।
मौके पर मौजूद नेताओं ने इसे “महिलाओं के सम्मान की लड़ाई” बताया। लेकिन सवाल यह है—सम्मान संसद में तय होगा या सड़कों पर?
दूसरी तरफ कांग्रेस का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है। उनका कहना है कि भाजपा यह बिल जानबूझकर ऐसे समय लाई, जब इसे लागू करना संभव नहीं था—ताकि पास न हो और मुद्दा जिंदा रहे।
कांग्रेस इसे “राजनीतिक स्टंट” बता रही है।

अब कहानी में ट्विस्ट सुनिए—
खुद नरेंद्र मोदी पहले कह चुके हैं—“अगर यह बिल पास हो जाए तो सबके लिए अच्छा है… नहीं हो तो विपक्ष को नुकसान।”
यानि जीत भी आपकी, हार भी आपकी… और फायदा भी आपका!

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस पूरे ‘नारी शक्ति’ अध्याय का अगला सीन बंगाल चुनाव में दिख सकता है—जहां महिलाओं के सम्मान का मुद्दा वोट बैंक में तब्दील होने की तैयारी में है।

इधर भाजपा इसे “महिलाओं का अपमान” बताकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है…
और उधर कांग्रेस कह रही है—“ये सब स्क्रिप्ट पहले से लिखी हुई है।”
अब जनता कन्फ्यूज है—
ये बिल महिलाओं के लिए है… या चुनावों के लिए?
अमलीपदर में पुतला जरूर जल गया…
लेकिन असली सवाल अब भी ठंडा नहीं हुआ ।
पुतला दहन कार्यक्रम में नवीन मांझी मण्डल अध्यक्ष, मुकेश साहू महामंत्री, रुकमणी यादव महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष, गंगावली यादव महिला मोर्चा मण्डल महामंत्री, ग्राम सरपंच हेमो बाई नागेश, जनपद सभापति निर्भय सिंह ठाकुर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बोधन नायक, संजय दुबे, संतोष यादव, मिश्री यादव, जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष हलमन ध्रुवा, उग्रसेन बघेल, भरत मांझी, रोहित कपिल, रोहित यादव, उपेन्द्र नेताम, भरत मिश्रा, तुला मांझी,मीडिया प्रभारी राजीव लोचन सहित मंडल के कई दिग्गज नेता शामिल रहे ।

फिर भी सबसे बड़ा सवाल यह है“नारी शक्ति को सम्मान कब मिलेगा ?—जब कानून लागू होगा या जब राजनीति खत्म होगी?”

