गीत बना फरियाद, गीत बना इनाम ।
दिव्यांग प्रफुल्ल और तिलोत्तमा की 24 साल की जंग को मिली जीत । जाजपुर की दिव्यांग भाई बहन की दर्द भरी दास्तां ने जीता देश की दिल । बढ़े मदद की हाथ ।
24 साल का सपना हुआ साकार
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
कभी बचपन में सुनी एक कहानी याद है आपको? एक अंधा और एक लंगड़ा, जो मिलकर ज़िंदगी की मुश्किल राहें पार करते हैं। ऐसी ही एक हकीकत से भरी कहानी है ओडिशा के जाजपुर जिले के कोरी ब्लॉक के रहने वाले प्रफुल्ल दास और उनकी बहन तिलोत्तमा की – जिसने ना सिर्फ़ राज्य बल्कि पूरे देश की संवेदनाओं को झकझोर दिया है।
बीते 24 सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते, उनके चप्पल घिस गए। मकान और ज़मीन के हक की मांग करते हुए वे नेता-मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और कलेक्टर जन् दर्शन तक अपनी फरियाद लेकर पहुंचे, मगर किसी ने नहीं सुना।

बचपन से प्रफुल्ल दृष्टिहीन हैं, जबकि उनकी बहन तिलोत्तमा के दोनों पैर के घुटने से नीचे का हिस्सा नहीं है । दोनों ही बचपन से दिव्यांग है ।चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बिना शादी किए दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर हारमोनियम बजाते गीत गाकर भीख मांगते हैं, और पेट पालते हैं। बहन रास्ता बताती है, भाई ट्राइसाइकिल चलाता है। ग़रीबी, बेबसी और दिव्यांगता – तीनों को हराकर वे अपनी लड़ाई जारी रखते रहे।

लेकिन कहते हैं न – जब जुबां नहीं सुनी जाती, तब सुर असर करते हैं।
एक दिन प्रफुल्ल अपने हारमोनियम के साथ जाजपुर कलेक्टरेट के सामने बैठ गए और गीतों के माध्यम से अपनी पीड़ा बयां करने लगे।
वह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया । एक लोकल न्यूज़ चैनल में आने लगा और तब जाकर पूरे सिस्टम की नींद खुली।

मुख्यमंत्री मोहन माझी ने संज्ञान लेते हुए तुरंत आदेश जारी किया। 4 डिसमिल की ज़मीन का पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान, और भरण-पोषण के लिए चावल व आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस आदेश ने वर्षों से आस लगाए बैठे भाई-बहन के चेहरे पर मुस्कान ला दी।

“जो नवीन सरकार 24 सालों में नहीं कर पाई, वह मोहन सरकार ने 24 घंटे में कर दिखाया,” स्थानीय लोगों का कहना है।
इस फैसले ने सिर्फ एक घर का सपना नहीं पूरा किया, बल्कि एक मानवता की मिसाल भी पेश की है।

प्रफुल्ल और तिलोत्तमा अब भी उसी टूटी झोंपड़ी में हैं, लेकिन उनके मन में अब आशा की एक मजबूत दीवार खड़ी हो गई है। मकान निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और अब वे फिर से अपने सुरों में सरकार को धन्यवाद देते गीत गा रहे हैं – जो सोशल मीडिया पर एक बार फिर वायरल हो रहा है।

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि यदि व्यवस्था संवेदनशील हो और नेता ज़मीन से जुड़े हों, तो दुख की सुरंग में भी उम्मीद की रौशनी पहुंच सकती है।
जाजपुर के इस दिव्यांग भाई-बहन की जोड़ी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

बस्तर की माटी न्यूज़ लगातार ऐसी मानवीय कहानियों को आपके सामने लाता रहेगा और कोशिश करेगा उन सभी जरूरतमंदों के बात, उनतक पहुंचाने के लिए जो हमेशा सोचते हैं मानव सेवा ही परम धर्मो और मदद के हाथ आगे बढ़ाने के लिए तत्पर रहते हैं ।

