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सगड़ा में जहरीली शराब का कारोबार, महिला समूह की दबिश से खुला राज । फिल्मी स्टाइल में लेट से पहुंची पुलिस

 

बस्तर की माटी न्यूज़,(BKM NATIONAL NEWS)

 

गरियाबंद जिले के अंतर्गत मैनपुर ब्लॉक में आने वाले सगड़ा गांव में महिलाओं ने वो कर दिखाया जो प्रशासन बरसों से करने में नाकाम रहा। गांव की नशा मुक्ति समिति ने दबिश देकर 10 लीटर जहरीली कच्ची शराब जब्त की और शराब बनाने के उपकरणों को मौके पर ही नष्ट कर दिया। लेकिन असली सवाल यह है कि जब गांव में खुलेआम यह मौत का कारोबार फल-फूल रहा था, तो पुलिस और आबकारी विभाग कहां सो रहे थे?

आरोपी भाग गया, पुलिस अगले दिन पहुंची
ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी दामोदर यादव पिता बुधु राम यादव अपने घर में महुआ और यूरिया मिलाकर जहरीली शराब तैयार कर रहा था। इससे करीब 100 लीटर से ज्यादा कच्ची शराब बनाने की तैयारी थी। महिला समूह की कार्रवाई के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। सूचना देने के बावजूद पुलिस देर शाम तक नहीं पहुंची। अगले दिन पुलिस गांव में आई, पंचनामा तैयार किया और जब्त सामान को कब्जे में लिया।

क्या विभागीय संरक्षण में पल रहा है यह धंधा?
ग्रामीणों का कहना है कि सगड़ा सहित आसपास के गांवों में सड़कों के किनारे और घरों में कच्ची शराब का कारोबार बेखौफ चल रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल कागजों पर होती है। महिला समूह के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह अवैध धंधा तभी संभव है जब इसमें कुछ अधिकारियों और स्थानीय रसूखदारों की मिलीभगत हो।

सवाल उठाते हैं कि ______

_ आखिर क्यों समय रहते पुलिस नहीं पहुंची?
_क्या शराब माफिया को पहले से भनक दी गई थी?
_बार-बार शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?
_ क्या सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते ग्रामीणों की जान जोखिम में डाली जा रही है?

“अगर महिलाएं कर सकती हैं, तो प्रशासन क्यों नहीं?”
गांव की महिलाओं की इस साहसिक पहल की हर तरफ सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव के लोग एकजुट होकर जहरीली शराब के खिलाफ खड़े हो सकते हैं, तो प्रशासन क्यों नहीं?

अब ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि पूरे क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार पर स्थायी रोक लगाई जाए और इसमें लिप्त माफिया के साथ-साथ विभागीय मिलीभगत की भी जांच की जाए।

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