सुशासन सरकार में पंचायत ने डस्टबिन खरीदी में किया घोटाला, पहले रीपा से मशीनें गायब, फिर सड़कों की दुर्दशा, अब लाखों के डस्टबिन का सवाल, विकास के नाम पर फैला भ्रष्टाचार
कागजों में बंटे डस्टबिन, ग्रामीण बोले – देखा ही नहीं कैसा होता है डस्टबिन
बस्तर के माटी समाचार
छत्तीसगढ़ प्रदेश के बीजापुर जिले के भोपालपटनम जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत रुद्रारम में पहले तो रीपा से लाखों रुपये के मशीनें चोरी हुई और अब फिर ऊंचे दान पर खरीदी गई डस्टबिन का सवाल। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले रीपा में लाखों रूपयों के मशीनों की चोरी होने की खबर आपने पढ़ी होगी अब 7 महिने बाद अब एक बार फिर ग्राम पंचायत व्दारा लाखों रुपए का डस्टबिन वितरण का फिर एक मामला उजागर हुआहकि ग्रामीणों ने बताया कि डस्टबिन कैसा होता है हमें मालूम ही नहीं है छत्तीसगढ़ में सुशासन से सरकार है भ्रष्टाचार जीरो टॉलरेंसक सरकार है ऐसे में कोई पंचायत सचिव 6 लाख के डस्टबिन खरीदी कर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा है तो जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर सवाल खड़ा होता है ।भोपालपटनम ब्लॉक के अन्तर्गत ग्राम पंचायत रूद्रारम में जहां केंद्र और राज्य शासन की योजनाओं की क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही ह। पंचायत सचिव कोरम विजय द्वारा डस्टबिन खरीदी के नाम पर 6 लाख 17 हजार 700 रुपये की राशि खर्च की गई, लेकिन जमीनी हकीकत में ग्रामीणों को न तो डस्टबिन मिला, और न ही डस्टबिन नजर आया।

16 वार्ड, 425 मकान और 6 लाख 17 हजार 700 की पंचायत ने खरीदी, लेकिन एक भी मकान में डस्टबिन नहीं दिखाई देती
ग्राम पंचायत रूद्रारम में कूचनूर, कोनागुड़ा, बोरगुड़ा और रूद्रारम गांव शामिल हैं, जहां कुल 16 वार्ड और लगभग 425 मकान हैं। पंचायत द्वारा कचरे के निपटान के लिए प्रत्येक मकान को डस्टबिन उपलब्ध कराने के नाम पर खरीदी की गई थी। डस्टबिनों की खरीदी के लिए पंचायत ने मार्च 2023 को 17,700 रूपये, अगस्त 2023 को 3 लाख रूपये और दिसंबर 2023 को 3 लाख रूपये कुल मिलाकर 6,17,700 राशि आहरण किया।
पंचायत में किस तरह केंद्र सरकार की वित्तीय योजना पर पंचायत सचिव द्वारा भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है, इसका ताजा उदाहरण अगस्त और दिसंबर 2023 की डस्टबिन खरीदी ,अगस्त 2023 में ग्राम पंचायत ने 120 नग डस्टबिन प्रति नग 2,500 रुपये की दर से कुल 3 लाख रुपये में खरीदारी इसके उदाहरण हैं । लेकिन हैरानी की बात यह रही कि महज कुछ महीनों बाद दिसंबर 2023 में सप्लायर को जैसे ही दया आई, उसने प्रति नग 1,750 रुपये कम करते हुए मात्र 750 रुपये में 400 नग डस्टबिन पंचायत को 3 लाख रुपये में सप्लाई कर दिया और पंचायत ने खुशी-खुशी खरीद भी लिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि डस्टबिन केवल हाईवे से लगे मकानों को दिए गए हैं, जबकि ग्राम पंचायत के अन्य वार्डों में रहने वाले लोगों को कोई भी डस्टबिन नहीं मिला। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि “अब तक हमने डस्टबिन देखा ही नहीं है”। इससे स्पष्ट है कि कागजों में लाखों खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप, 15 सालों से सड़क बदहाली में, 90 लाख अन्य कार्यों में खर्च
यह पहली बार नहीं है जब रूद्रारम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे रहे हों। ग्रामीण पहले भी सरपंच और सचिव पर 90 लाख की खर्च में पारदर्शिता न होने और 15 वर्षों से दलदल में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत न करवाने को लेकर आवाज उठा चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नदारद होना पंचायत सचिव की लापरवाही हैं।
रूद्रारम पंचायत में डस्टबिन खरीदी के नाम पर खर्च की गई 6.17 लाख की राशि अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों को डस्टबिन नजर नहीं आया, और जिम्मेदार जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। रीपा से मशीनों के गायब होने के सात महीने बाद यह दूसरी बड़ी वित्तीय अनियमितता है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि पंचायत में सरकार की योजनाएं जमीन पर नहीं, सिर्फ कागजों मे ही सिमटकर रह गई है।
आपको बताते चलें कि जिस डस्टबिन की बाजार मूल्य 400 से 600 रुपये के बीच है, वही डस्टबिन पंचायत ने 2,500 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा। क्या पंचायत ने ये डस्टबिन अन्य देशों से मंगवाएं थे या इनमें सोने की परत चढ़ी हुई थी? जनता के पैसे से की गई इस मनमानी खरीदी ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आखिर पंचायत और सप्लायर के बीच ये रिश्ता क्या कहलाता है?
प्रशासन को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में जनहित की योजनाएं, जनहित में ही लागू हो सकें न कि फाइलों और बिलों में ही खो जाएं।
” इस संबंध में जनपद सीईओ सुरेश देवांगन जनपद पंचायत भोपालपटनम ने कहा,आपके व्दारा मेरे संज्ञान में आया है, डस्टबिन खरीदी कर ग्रामीणों को वितरण नहीं करना किया गया है तो यहां जांच का विषय है इस पर जल्द ही जांच कराया जायेगा।”

