दीवान की दीवानगी_ अश्लील मंच, सरकारी चुप्पी और आचरण की आंख-मिचौली
उरमाल अश्लील नृत्य कांड अब सिर्फ एक नहीं कई सरकारी दीवाने कटघरे में । और कितने मुक गवाह ?
बस्तर की माटी न्यूज़(BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
कहते हैं दीवाने अगर बहक जाए तो सिर्फ दिल नहीं, सिस्टम भी नाचने लगता है।
अश्लील नृत्य कांड में अब एक नया चेहरा सोशल मीडिया के मंच पर पूरे ठसक के साथ थिरकता नज़र आ रहा है
चेहरा किसी आम बाबू का नहीं,

बल्कि निलंबित एसडीएम के राजस्व कुनबे से ताल्लुक रखने वाले “खास पटवारी दीवान साहब” का है। दो-दो जगह का बोझ को हल्का करने गए ये हल्का पटवारी के ऊपर एक्शन लेकर क्या उनके कार्य को भी हल्का किया जाएगा ?

वीडियो में दीवान साहब, दीवानगी की उस ऊँचाई पर दिखते हैं,जहाँ न नियम दिखते हैं,न आचरण,
बस दिखता है —
नोटों की बारिश और तालियों की तालीम।
अब सवाल ये नहीं कि दीवान साहब दीवाने हुए…
सवाल ये है कि क्या सरकार भी उनके दीवानेपन पर दीवानी हो जाएगी?
एसडीएम साहब तो निलंबित हो गए,
लेकिन दीवान साहब? क्या उनके लिए आचरण नियमों की किताब में कोई अलग अध्याय है —
“यह मेरी मां, वह तेरी मौसी” संस्करण?

जब मंच पर नाच अश्लील हो,नोट सरकारी जेब से आए हों,और दीवान साहब सरकारी पहचान के साथ ताल दे रहे हों —तो क्या ये सिर्फ मनोरंजन है या आचरण विधि का खुला उल्लंघन?
लोग पूछ रहे हैं —
धान तस्करी में बड़े मगरमच्छ छूट जाते हैं । दिनदहाड़े पिकअप,ट्रक से धान का तस्करी करते हैं और स्टिंग के नाम पर कोटवार बली का बकरा बन जाता है,
तो क्या इस बार भी दीवान की दीवानगी पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
या फिर

सरकारी चाबुक सिर्फ एसडीएम तक ही सीमित रहेगा,और नोट दिखा रहे अन्य राजस्व कर्मचारी, बाकी विभागों के दीवाने,दीवानगी का आनंद लेकर फाइलों में गुम हो जाएंगे?

आज चर्चा यही है —
क्या कानून सबके लिए बराबर है
या फिर कुछ लोग सिर्फ इसलिए बच जाते हैं क्योंकि वो “अपने” दीवान होते हैं?
जनता अब जवाब चाहती है।
क्योंकि
अगर दीवान की दीवानगी पर भी कार्रवाई नहीं हुई, तो कल हर दीवाना कहेगा —
“नाच तो मंच पर था, लेकिन संरक्षण सिस्टम का था।”

