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भाजपा के डबल इंजन की सरकार में आदिवासी बेटियाँ असुरक्षित- विक्रम मंडावी 

 

 

विधानसभा में गूंजा गंगालूर का मामला, कांग्रेस विधायक दल और विक्रम मंडावी ने स्थगन प्रस्ताव लाकर उठाया मामला, सरकार के जवाब से संतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर विरोध किया 

 

 

मीडिया में झूठा, भ्रामक, निराधार और तथ्यहीन बयान देने वाले DEO और अधीक्षक पर हो कार्रवाई- विक्रम मंडावी 

 

 

बस्तर के माटी समाचार 

बीजापुर जिले के गंगालूर पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास में तीन छात्राओं (दो नाबालिग सहित) के गर्भवती होने का मामला प्रकाश में आने के बाद बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि गर्भावस्था 3 से 5 महीने पुरानी है – इसका मतलब है कि यह अपराध छात्रावास/स्कूल के समय में ही हुआ। यह घटना सरकारी व्यवस्था की घोर लापरवाही, निगरानी की कमी और आदिवासी बेटियों के साथ विश्वासघात का जीता-जागता प्रमाण है। लेकिन सबसे अधिक निंदनीय जिला शिक्षा अधिकारी बीजापुर का 15 मार्च 2026 को जारी प्रेस बयान जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी कहते हैं- 1- “छात्राएं अब छात्रावास में अध्ययनरत/निवासरत नहीं हैं”।

2- “खबर पूर्णतः भ्रामक, निराधार और तथ्यहीन है”।

3- “वे स्वामी आत्मानंद स्कूल में पढ़ रही हैं” या “5 महीने से अनुपस्थित हैं”।

इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी और छात्रावास अधीक्षक से विधायक विक्रम मंडावी ने सवाल पूछा कि

1- छात्रावास में “अब नहीं हैं” कहकर आप 3-5 महीने पहले की इस गंभीर अपराध की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं? अनुपस्थिति के कारणों, मासिक स्वास्थ्य जांचों और निगरानी की जांच क्यों नहीं हुई?

2- क्या सरकारी स्कूल/छात्रावास में पढ़ने वाली नाबालिग आदिवासी लड़कियों की सुरक्षा सिर्फ “छात्रावास में रहती थीं या नहीं” पर खत्म हो जाती है? शिक्षा विभाग, अधीक्षक, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और जिला प्रशासन – क्या इनकी कोई जवाबदेही नहीं बची?

3- DEO साहब, आप “भ्रामक” कहकर मीडिया और जनता को गुमराह क्यों कर रहे हैं? क्या यह दोषियों को बचाने का प्रयास है, या फिर सरकार की लापरवाही को छिपाने का?

विधायक विक्रम मंडावी ने अपने प्रेस बयान में आगे कहा कि प्रदेश में भाजपा के डबल इंजन की सरकार बनने के बाद बीजापुर जिले के पोर्टा केबिन, आश्रम शालाओं और छात्रावासों में आदिवासी छात्र-छात्राओं की मौतें, शोषण और अब गर्भवती होने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार में आदिवासी बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं – न स्कूलों में, न छात्रावासों में, न सड़कों पर। माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी संस्थानों के भरोसे भेजते हैं, लेकिन बदले में मिल रहा है तो सिर्फ अपमान , शोषण और विश्वासघात फिर भी प्रशासन की प्राथमिकता में जांच नहीं करवाकर खबर को दबाने और दोषियों को बचाने की हो रही है।

इसके साथ ही विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार से

1- जिला शिक्षा अधिकारी बीजापुर लखन लाल धनेलिया और छात्रावास अधीक्षक पर लापरवाही के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने हुए उन्हें तुरंत पद से हटाया जाने

2- उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित करने जिसमें– पुलिस, महिला आयोग, स्वास्थ्य विभाग, विधायक/विपक्ष प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों को शामिल करें।

3- जो भी दोषी अधिकारी और कर्मचारी हैं उन पर FIR दर्ज करने।

4- सभी पोर्टा केबिन/छात्रावासों में CCTV, मासिक मेडिकल चेकअप, काउंसलिंग और 24×7 सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और

5- पीड़ित छात्राओं को पूर्ण चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता और कानूनी मदद दिये जाने आदि की माग की है।

“*वही सोमवार को विधानसभा में बीजापुर के कांग्रेस विधायक दल एवं विक्रम मंडावी ने गंगालूर की घटना को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर मामले को उठाया इसके बाद सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर विरोध किया गया है।*”

विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि यदि ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कांग्रेस पार्टी बीजापुर में न्याय की मांग को लेकर जनसहयोग से पीड़ितों को न्याय मिलने तक उग्र आंदोलन करेगी।

 

 

 

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