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दो सुई… और दो बैलों की मौत! सरकारी डॉक्टर गायब, झोलाछाप का इलाज बना किसानों की मजबूरी

इंदागांव थाना क्षेत्र के सगड़ा गांव का मामला, सांप के काटने की अफवाह के बीच इंजेक्शन से मौत पर उठे गंभीर सवाल

बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

खेती का मौसम शुरू हो चुका है। किसान खेतों में उम्मीद बो रहे हैं, लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि खेत बचाने वाले बैल भी अब भगवान भरोसे हैं। सरकारी पशु चिकित्सालय भवन तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं। ऐसे में किसान मजबूरी में झोलाछापों के भरोसे हैं और यही मजबूरी अब जानलेवा साबित होती नजर आ रही है।


मामला मैनपुर ब्लॉक के इंदागांव थाना क्षेत्र के सगड़ा गांव का है। यहां किसान सुर्बल यादव के दो बैल खेत की जुताई के दौरान कमजोर पड़ गए। परिवार ने गांव में इलाज करने वाले कथित झोलाछाप परमानंद यादव को बुलाया। आरोप है कि उसने दोनों बैलों को दो इंजेक्शन लगाए और कहा कि, “बैल बहुत कमजोर हैं, बोतल चढ़ानी पड़ेगी। मैं बोतल लेकर आता हूं।” लेकिन बोतल आने से पहले ही दोनों बैलों ने दम तोड़ दिया।


इसके बाद आनन-फानन में बैलों को दफना दिया गया। गांव में यह बात फैलाई गई कि बैलों की मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन ग्रामीणों के बीच अब चर्चा कुछ और है। सवाल उठ रहा है कि यदि इंजेक्शन लगाने के करीब एक घंटे के भीतर दोनों बैलों की मौत हुई, तो आखिर मौत की असली वजह क्या थी?

सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर हर गांव में उपलब्ध हैं। सरकार ने अस्पताल बना दिया, बोर्ड भी लगा दिया, लेकिन डॉक्टर भेजना शायद फाइलों में ही अटक गया। नतीजा यह है कि किसान मजबूरी में ऐसे लोगों के भरोसे अपने पशुओं का इलाज कराते हैं, जिनकी योग्यता पर ही सवाल खड़े होते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या….

_दोनों बैलों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा?

_इंजेक्शन लगाने वाले कथित झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं?

_किसान को मुआवजा मिलेगा या नहीं?

_क्षेत्र में वर्षों से खाली पड़े पशु चिकित्सक के पद कब भरेंगे?

_या फिर यह मामला भी हर बार की तरह कुछ दिनों की चर्चा बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा?

दो बैलों की मौत केवल एक किसान का नुकसान नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल है, जो किसानों को मजबूरी में झोलाछापों के भरोसे छोड़ देती है। खेती के इस महत्वपूर्ण समय में बैलों का चले जाना किसान के लिए किसी बड़े आर्थिक संकट से कम नहीं है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर यह घटना भी सिर्फ एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगी।

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