संपादक घनश्याम यादव की क़लम से
बीजापुर, छत्तीसगढ़ बस्तर के माटी समाचार । जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत सागमेटा में पंचायत सचिव द्वारा डिजिटल सिग्नेचर कार्ड (DSC) का दुरुपयोग करके 14वें और 15वें वित्त आयोग योजना के तहत भ्रष्टाचार किए जाने का मामला सामने आया है। यह भ्रष्टाचार फरसेगढ़ में संचालित बालक आश्रम में शौचालय मरम्मत कार्य के नाम पर किया गया है।

मामले की जानकारी तब हुई जब पंचायत के निर्माण कार्य तथा व्यय की जानकारी आनलाइन देखा गया जिसमें पंचायत सचिव सुरेश जंगेटी ने शौचालय मरम्मत कार्य के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि का गबन किया है।

इसके लिए उन्होंने अपने डिजिटल सिग्नेचर कार्ड (DSC) का दुरुपयोग करते हुए धनराशि का आहरण किया। इस मामले को लेकर जब मुकावेली बालक आश्रम पहुंचकर शौचालय की स्थिति से देखने पर पता चला कि जब से निर्माण किया गया तब से आज तक मरम्मत कार्य नहीं कराया गया

जर्जर हालत में शौचालय में छात्र शौच करने के लिए मजबूर हैं ।14वें और 15वें वित्त आयोग योजना के तहत आवंटित की राशि DSC के जरिए आहरण किया

और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है उसका उद्देश्य ग्रामीण विकास और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाना था।
भ्रष्टाचार की योजना

पंचायत सचिव ने बालक आश्रम में शौचालय मरम्मत कार्य के नाम पर कागजी कार्रवाई की और डिजिटल सिग्नेचर कार्ड का उपयोग करके धनराशि का आहरण किया।

हालांकि, मौके पर पहुंचे पत्रकारों को गया कि वास्तव में शौचालय मरम्मत कार्य नहीं किया गया है और 14 वें वित्त और 15 वित्त योजना की राशि का गबन किया गया है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है, क्योंकि यह धनराशि ग्रामीण विकास और बच्चों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए थी।

स्थानीय प्रतिक्रिया:
स्थानीय निवासियों और पूर्व सरपंच ने इस मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह भ्रष्टाचार न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है,

बल्कि ग्रामीण विकास और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। उन्होंने प्रशासन से मामले की त्वरित जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत भैरमगढ़ ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी आपके माध्यम से हुई है जांच की जाएगी उसके पश्चात संबंधित पंचायत सचिव पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी

यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और जवाबदेही की लापरवाही को उजागर करता है।

पूर्सव रपंच ने मांग की है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामले दोबारा न हों।
