

राजीव लोचन
बस्तर के माटी समाचार अमलीपदर/गरियाबंद
गोहरापदर से भेजीपदर सड़क की बदहाली से ग्रामीण परेशान, जल्द मरम्मत की मांग
प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनी गोहरापदर से भेजीपदर सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां से गुजरना वाहन चालकों के लिए खतरे से कम नहीं है। 16 साल पहले बनी इस सड़क की दुर्दशा आज भी वैसी ही बनी हुई है। जगह-जगह गहरे गड्ढे और क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण छोटे वाहनों का गुजरना मुश्किल हो गया है।

महत्वपूर्ण मार्ग, लेकिन दुर्दशा बनी समस्या यह मार्ग क्षेत्रवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर बारिश के समय, जब सुखा तेलनदी में पानी भर जाता है और लोगों को इस सड़क का ही सहारा लेना पड़ता है। रायपुर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह मार्ग एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है, लेकिन इसकी बदहाली के चलते उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मरम्मत कार्य अधूरा, ग्रामीणों में आक्रोश चार साल पहले लगभग 65 लाख रुपये खर्च कर इस सड़क की मरम्मत का काम शुरू किया गया था, लेकिन कार्य भेजीपदर पहुंचने से पहले ही बंद कर दिया गया। गांववालों का कहना है कि विभाग के अफसरों ने बचत के लिए सड़क को अधूरा छोड़ दिया, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

वहीं, सड़क के एंडिंग पॉइंट पर कांडेकेला जीरो किलोमीटर लिखा गया है, जबकि भेजीपदर ग्राम वहां से दो किलोमीटर आगे है। यह प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, जिससे राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की अनदेखी, बढ़ता आक्रोश ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत लगभग 17 साल पहले जोगी सरकार के समय बनाई गई थी, लेकिन अब इसे प्रशासन ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। हर साल इस मार्ग पर कई दुर्घटनाएं होती हैं, मगर अब तक अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। खासकर देवभोग से भेजीपदर और गोहरापदर तक चलने वाली बसों के यात्रियों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बारिश के मौसम में जब सुखा तेलनदी में पानी का स्तर बढ़ जाता है, तब इस मार्ग का उपयोग अनिवार्य हो जाता है। लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति के कारण यह सफर जोखिम भरा बन गया है। सरकार ने सुखा तेलनदी पर पुलिया का निर्माण भी चार साल से अधूरा छोड़ रखा है, जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

सरकार से अपील: जल्द हो मरम्मत, नहीं तो आंदोलन क्षेत्रवासियों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द इस सड़क की मरम्मत कराई जाए, ताकि आने-जाने में किसी को कोई दिक्कत न हो। यदि सरकार ने शीघ्र कोई कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीण बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं
“तीन साल पहले इस सड़क की मरम्मत कांडेकेला तक कर दी गई, जिस पर 65 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन कांडेकेला से भेजीपदर तक की सड़क को अधूरा छोड़ देना जांच का विषय है।”
— श्रवण कुमार सतपथी, अमलीपदर
“ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और पूरी सड़क को सुधारने की मांग की है।”