अमृत सिंह
नई दिल्ली/ रायपुर बस्तर के माटी समाचार , 3 अप्रैल रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में खाद्य उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों को लेकर संसद में सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से यह जानकारी मांगी कि क्या छत्तीसगढ़ में खाद्य उत्पादों से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी के लिए कोई विशेष समिति गठित की गई है। यदि ऐसा है, तो उसकी अनुशंसाओं को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, और इस संबंध में विस्तृत जानकारी कब तक प्रस्तुत की जाएगी।
श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कोई प्रभावी तंत्र स्थापित करने पर भी जानकारी मांगी है। जिसपर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने बताया कि सरकार ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में खाद्य उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी के लिए कोई विशेष समिति गठित नहीं की है। हालांकि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने 12 दिसंबर 2024 के परिपत्र के माध्यम से एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया है, जो प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के भ्रामक प्रचार का समाधान करने, उपभोक्ताओं को सही जानकारी सुनिश्चित करने और नैतिक विज्ञापन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है।
मंत्री ने आगे बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 24(1) के तहत, किसी भी खाद्य उत्पाद का भ्रामक या प्रवंचनापूर्ण विज्ञापन प्रतिबंधित है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्री-पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग से संबंधित आवश्यकताओं के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम, 2020 अधिसूचित किया है, जिसका पालन सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों को करना अनिवार्य है। साथ ही, खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 को लागू किया गया है, जिससे खाद्य उत्पादों के संबंध में निष्पक्ष दावे और विज्ञापन सुनिश्चित किए जा सकें। इन नियमों के उल्लंघन पर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस विषय पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कर छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और इसके लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।