प्रदेश में शिक्षा पर संकट : युक्तियुक्तकरण के विरोध में गरजे संजय नेताम
बस्तर के माटी न्यूज़(BKM)गरियाबंद
प्रदेश सरकार द्वारा जारी शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण आदेश के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने तीखा विरोध दर्ज करते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ “खिलवाड़” करार दिया है। नेताम ने दावा किया है कि सरकार 4,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना बना रही है, जो विशेष रूप से आदिवासी अंचलों के बच्चों के लिए भारी नुकसानदायक होगा।
शिक्षा से समझौता, शराब को बढ़ावा?
संजय नेताम ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 67 नई शराब दुकानों की अनुमति देकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा की बजाय शराब को प्राथमिकता दी जा रही है।”
शिक्षकों की संख्या में कटौती, नई भर्ती पर असर
नेताम ने बताया कि नए सेटअप के तहत प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों में कटौती की जा रही है, जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि नियमित शिक्षक पदों पर नई भर्तियों के अवसर भी कम हो जाएंगे।
मध्याह्न भोजन और महिला समूहों पर संकट
स्कूल बंद होने की स्थिति में रसोइयों, स्लीपरों और मध्यान भोजन बनाने वाली महिला स्वसहायता समूहों के समक्ष भी रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जाएगा। संजय नेताम ने सरकार से यह निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की है।
दो शिक्षकों से 18 कक्षाएं कैसे सम्भव?
उन्होंने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में 18 विषयों की पढ़ाई तीन शिक्षकों के माध्यम से होती है, जबकि अब युक्तियुक्तकरण के तहत केवल दो शिक्षकों को यह कार्यभार सौंपा जा रहा है। क्या दो शिक्षक इतने विषय पढ़ा सकते हैं? क्या सरकार को बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं? — नेताम ने सवाल किया।
वैकल्पिक सुझाव नहीं, सिर्फ भार बढ़ाने की नीति
प्रदेश में 58,000 से अधिक शिक्षकों के पद पहले से ही रिक्त हैं। हर महीने सैकड़ों शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, प्रमोशन और स्थानांतरण की नीतियों में स्पष्टता नहीं है। इन सबके बीच युक्तियुक्तकरण लाकर सरकार ने एक अव्यवहारिक कदम उठाया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी।
जनहित में मांग
नेताम ने स्पष्ट कहा कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस कार्यकर्ता जन आंदोलन की राह अपनाने पर मजबूर होंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की बजाय उसे सुदृढ़ करने पर ध्यान दें।

