2.43 करोड़ की लागत से बना अस्पताल भवन दो साल में ही जर्जर, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद
जिले के अमलीपदर में करीब 2.43 करोड़ की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल महज दो साल में ही खराब हो गया है। वर्ष 2023 में जिस अस्पताल का उद्घाटन बड़े समारोह के साथ हुआ था, आज उसकी दीवारों में दरारें पड़ गई हैं और छत से पानी टपक रहा है। मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस जर्जर भवन में रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भवन की नींव कमजोर या फिर निर्माण में गड़बड़ी?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल भवन की नींव मजबूत नहीं डाली गई थी, जिसके चलते बरसात में मिट्टी धंसक गई और पूरा ढांचा कमजोर हो गया। जगह-जगह उखड़ी हुई टाइल्स और दरकती दीवारें इस बात का संकेत दे रही हैं कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर करोड़ों की लागत के बावजूद अस्पताल की उम्र इतनी कम क्यों निकली?

स्टाफ आवास भी अधर में लटका
अस्पताल में काम कर रहे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के लिए रहने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। पुराने क्वार्टर जर्जर हालत में हैं जबकि नए क्वार्टर का निर्माण मार्च 2024 तक पूरा होना था। निर्माण एजेंसी अब तक इसे अस्पताल प्रबंधन को सौंप नहीं पाई। नतीजतन कई कर्मचारी बाहर किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

बैठकें होती रहीं, लेकिन समाधान नहीं
अस्पताल में पिछले महीने जीवनदीप समिति की बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन इसके बाद भी भवन की स्थिति जस की तस बनी हुई है। छत से टपकता पानी और टूटी-फूटी खिड़कियां अधिकारियों की उदासीनता की पोल खोल रही हैं।
पहले भी विवादों में रहा यह अस्पताल
याद दिला दें कि यही अस्पताल पिछले साल उस वक्त सुर्खियों में आया था जब यहां मोबाइल की रोशनी में एक गर्भवती महिला की डिलीवरी करानी पड़ी थी। अब भवन की हालत देखकर मरीजों के दिल में दहशत बैठ गई है।
कौन है जिम्मेदार?
लोगों की नजर अब उस निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार विभाग पर है जिन्होंने भवन की गुणवत्ता की निगरानी करनी थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी या यह भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?

