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बीजापुर में नदियों की रगंडी: रेत तस्करों का बेतहाशा खेल जारी, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

Ghanshyam yadav 6261009922 एडिटर इन chief बस्तर के माटी news paper

बीजापुर बस्तर के माटी समाचार(छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की इंद्रावती और गोदावरी नदी को रेत तस्करों ने अपना निजी खजाना बना लिया है। तेलंगाना और महाराष्ट्र के तस्कर जिले के भोपालपटनम सीमा पर स्थित वासी गांव, तरलागुड़ा और चांदूर इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रेत की तस्करी कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा हाल में एक बड़ी कार्रवाई दर्ज की गई है, लेकिन स्थानीय लोग और तथ्य यही बता रहे हैं कि यह समस्या बदस्तूर जारी है।

पहले भी हुई थी कार्रवाई, पर रह गई नाकाम

इससे पहले बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाई और प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रशासन ने कुछ गाड़ियां जब्त करने की औपचारिकता निभाई थी, लेकिन वह कार्रवाई नाकाफी साबित हुई और तस्करी जारी रही। अब सवाल यह उठता है कि क्या सुशासन के सरकार में प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है या सरकार के दबाव में प्रशासन काम कर रही है? या रेत अवैध रूप से परिवहन करने वाला कोई भाजपा का नेता है। लगातार रात में हो रही अवैध रेत परिवहन तस्करी पर खनिज विभाग कार्यवाही करने से क्यों परहेज कर रही है समझ सकते हैं।

 

ताजा कार्रवाई में जब्त हुए 14 ट्रक, लेकिन सवाल बरकरार

 

हालिया कार्रवाई में, भोपालपटनम के तहसीलदार द्वारा एक हाईवा और 14 ट्रकों को जब्त किया गया है। इनमें से 11 ट्रक प्रभाकर चौधरी के और 3 ट्रक श्रीनिवास के बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई जीएसटी में गड़बड़ी, भंडारण की अवैध मात्रा और सरकारी जमीन पर अवैध भंडारण(डंपिंग) को लेकर की गई है। प्रकरण दर्ज कर एसडीएम कार्यालय भेजा गया है।

 

कार्रवाई के बाद भी जारी है तस्करी के सबूत

 

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी तिमिर और चांदूर स्थित रेत भंडारण स्थलों पर तेलंगाना के ट्रकों की लंबी कतारें लगी देखी गई हैं। खबरों के मुताबिक, कई ड्राइवर पुलिस के आने की भनक पाते ही अपना माल (रेत) खदान में ही खाली करके भाग खड़े हुए। यह स्पष्ट संकेत है कि बड़े पैमाने पर रेत की आपूर्ति तेलंगाना की ओर की जा रही है।

 

स्थानीय लोगों का आरोप- प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है धंधा

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत ठेकेदार प्रशासन की नाक के नीचे वर्षों से यह अवैध कारोबार चला रहे हैं और उनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि पिछली कार्रवाइयाँ महज दिखावा बनकर रह गईं। एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पहले ही धरंस स्थल को सील किया जा चुका था, तो ताला तोड़कर ठेकेदारों ने इसे दोबारा कैसे चालू कर दिया?

 

बड़ा सवाल: प्रशासनिक मिलीभगत का शक

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदार ठेकेदारों पर वास्तव में कठोर कार्रवाई कर पाएगा या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? इस बात पर भी संदेह जताया जा रहा है कि खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से ही यह धंधा चल रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में तेलंगाना बॉर्डर से भोपालपटनम लगभग 40 किलोमीटर दूर है और जो गाड़ियां माल भरने आ रही हैं, उनका छत्तीसगढ़ का परमिट नहीं है। फिर भी वे छत्तीसगढ़ आकर माल भरकर ले जा रहे हैं, यह स्वयं में एक गंभीर जांच का विषय है।

 

अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस अवैध तस्करी के खिलाफ सख्त और ठोस कार्रवाई करेगा या नहीं

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