RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

मौत का सौदागर: झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही ने ली ग्रामीण की जान

पेंड्रा गांव में दिल दहला देने वाली घटना, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

घर-घर घूमने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कारवाई कब?

बस्तर की माटी न्यूज़(BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद 

जिले के पेंड्रा गांव में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। 45 वर्षीय पुरुषोत्तम ध्रुव, जो पाइल्स की बीमारी से पीड़ित थे, इलाज के नाम पर कथित बंगाली डॉक्टरों के झांसे में आ गए। परिजनों का आरोप है कि इलाज के लिए 30 हजार रुपए में सौदा तय हुआ था।

इलाज के नाम पर अमलीपदर से आए संजू मंडल उर्फ संजू राजपूत और ओडिशा के टीमनपुर निवासी बबलू टांडीआ ने पहले ही दो बार आकर 10-10 हजार रुपए वसूले। शनिवार को तीसरी बार जब वे पहुंचे तो इंजेक्शन और दवा देने के बाद पुरुषोत्तम की हालत बिगड़ने लगी। परिवार को यह कहकर समझा दिया गया कि “मरीज को सुला दीजिए, दवा असर कर रही है।” लेकिन कुछ ही देर बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई और परिजन जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

जिला अस्पताल के डॉ. हरीश चौहान ने बताया कि “पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इलाज के दौरान हुए जख्म ही मौत का कारण पाए गए हैं।” वहीं, एडिशनल एसपी जितेंद्र चंद्राकर ने कहा कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

झोलाछाप का दबदबा: चौथी-पांचवीं पास भी बन जाते हैं ‘डॉक्टर’

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों के चलते झोलाछाप डॉक्टरों का दबदबा इतना ज्यादा है कि चौथी-पांचवीं पास कोई भी व्यक्ति सिर्फ सुई लगाना सीखकर खुद को डॉक्टर बता देता है। झोला लेकर घूमने वाले ऐसे नकली डॉक्टरों के पास भारी भरकम दवाइयों और प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स का जखीरा होता है। गली-मोहल्लों से लेकर साप्ताहिक बाजारों तक में ऐसे लोग मरीजों को इंजेक्शन लगाते, खून-पेशाब की जांच करते और हर बीमारी का इलाज करने का दावा करते आसानी से मिल जाएंगे।

सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब जिम्मेदार अफसरों और स्वास्थ्य विभाग की आंखों के सामने होता है। सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों सरकार इन घूमने वाले झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं कर पाती? कार्रवाई के नाम पर अक्सर डिग्रीधारी डॉक्टरों और अस्पतालों पर ही शिकंजा कसता है, जबकि असली खतरा उन लोगों से है जो बिना डिग्री और अनुभव के लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से पनप रहा झोलाछाप नेटवर्क

विशेषज्ञ मानते हैं कि मैनपुर और छूरा ब्लॉक जैसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते लोग मजबूरी में ऐसे नकली डॉक्टरों पर भरोसा कर लेते हैं। खासकर वायरल सीजन में इनकी मांग और बढ़ जाती है। गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी, दवाओं का अभाव और सुविधाओं की लचर स्थिति लोगों को झोलाछापों के पास धकेल देती है।

सरकारी दवाखानों में जांच और दवाएं मुफ्त उपलब्ध होने के बावजूद भी लोगों को वहां सही इलाज न मिलने के कारण वे इन कथित डॉक्टरों की गिरफ्त में फंस जाते हैं। यह केवल पेंड्रा गांव की घटना नहीं है, बल्कि पूरे जिले में इसी तरह के “चलते-फिरते झोला छाप डॉक्टर” मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं।

 

आदिवासी परिषद की चेतावनी: 50 लाख मुआवजे और कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिषद ने मृतक के परिवार को मां पूजा के तौर पर 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है। परिषद के नेताओं ने कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ही झोलाछाप डॉक्टरों पर नकेल नहीं कसी, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

आदिवासी नेता संजय नेताम ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उक्त दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार ने भी प्रशासन को लिखित आवेदन देकर न्याय की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसे डॉक्टरों पर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो किसी और की जान भी इसी तरह जा सकती है।

सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

झोलाछाप डॉक्टरों का खुलेआम चल रहा कारोबार सरकार और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है। जब भी कार्रवाई की बात आती है तो केवल डिग्रीधारी डॉक्टरों को ही कठघरे में खड़ा किया जाता है, जबकि चौथी-पांचवीं पास झोलाछापों के खिलाफ एक भी गंभीर कार्रवाई अब तक नहीं हुई। यही वजह है कि इनका हौसला लगातार बुलंद होता जा रहा है।

पुरुषोत्तम ध्रुव की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अगर जिम्मेदार अधिकारी अब भी नहीं चेते तो आने वाले दिनों में और भी कई निर्दोष ग्रामीण इन “मौत के सौदागरों” की भेंट चढ़ सकते हैं।

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग