RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

सरकार से पहले जागे नौजवान — अमलीपदर के युवाओं ने पॉकेट मनी से किया वो काम, जो सालों से फाइलों में अटका था”

अपनी पॉकेट मनी से कचरा वाहन दुरुस्त कर,संभाली मोहल्ले की सफाई और स्कूली बच्चों के सुरक्षा की जिम्मेदारी

बस्तर की माटी न्यूज़ _ गरियाबंद

गरियाबंद जिले के अमलीपदर क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जो यह साबित करती है कि अगर इरादे सच्चे हों और जज़्बा मजबूत, तो किसी भी बदलाव के लिए सरकार का इंतज़ार नहीं करना पड़ता। जहां सरकारी विभाग वर्षों से सफाई और स्कूल सुरक्षा के नाम पर सिर्फ योजनाओं और फाइलों में उलझे हुए थे, वहीं कुछ जोशीले युवाओं ने अपने पॉकेट मनी से वो काम कर दिखाया जिसे करने के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनी थीं।

अमलीपदर के इन युवाओं ने पहले पंचायत में जंग खाकर कबाड़ बन चुके कचरा वाहन को खुद की जेब से मरम्मत करवाया। गाड़ी की रंग-रोगन करवाई, इंजन दुरुस्त करवाया और अब वही गाड़ी पूरे मोहल्ले की सफाई में जुटी है। हफ्ते में दो दिन ये युवा खुद गाड़ी चलाकर मोहल्ले-मोहल्ले से कचरा उठाते हैं और पूरे क्षेत्र को स्वच्छ रखने का जिम्मा निभा रहे हैं।

 

इन युवाओं की पहल यहीं खत्म नहीं हुई। जब उन्होंने देखा कि पंचायत में वर्षों से कोई स्थायी सफाईकर्मी नहीं है, और गांव की गलियां कचरे व गंदगी से पटी पड़ी हैं, तो उन्होंने श्रमदान और सहयोग से जेसीबी और ट्रैक्टर मंगवाकर मोहल्ले की सफाई अभियान चलाया। इस सफाई कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी दिलीप कुमार मेश्राम, जनपद सदस्य निर्भय ठाकुर, वार्ड सदस्य और ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। बुजुर्गों से लेकर महिलाओं तक—सबने श्रमदान दिया और एक मिसाल पेश की कि समाज की ताकत क्या होती है।

 

युवाओं का यह जोश यहीं नहीं रुका। उन्होंने देखा कि प्राथमिक शाला में बाउंड्री वॉल न होने के कारण असामाजिक तत्वों की आवाजाही आम हो गई है। कई बार विभाग से शिकायत हुई, लेकिन फाइलें केवल कागजों में घूमती रहीं। आखिरकार मोहल्ले के युवाओं ने निर्णय लिया कि जब सरकार नहीं कर रही तो हम करेंगे। अपने पॉकेट मनी और श्रमदान से उन्होंने स्कूल की बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू कर दिया। खुद सीमेंट, रेत और ईंट खरीदकर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।

अमलीपदर का यह उदाहरण सिर्फ सफाई या दीवार निर्माण तक सीमित नहीं है, यह सरकारी व्यवस्था की जमीनी सच्चाई भी उजागर करता है। करोड़ों रुपए की योजनाओं के बावजूद न तो सफाई व्यवस्था सुधरी, न स्कूलों की मरम्मत पूरी हुई। सरकार और विभागों की लापरवाही अब जनता की आंखों के सामने है। सवाल यह है कि जब गांव के युवा अपने बलबूते इतना कुछ कर सकते हैं, तो सरकारी व्यवस्था क्यों नहीं? क्या योजनाएं सिर्फ रिपोर्टों और फोटो सेशन तक सीमित रह गई हैं?

अमलीपदर के इन युवाओं ने “संघर्ष समिति” बनाकर एक नई सोच की शुरुआत की है—“पहले खुद बदलो, फिर समाज बदलेगा”। उनकी यह मुहिम अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग कह रहे हैं, “अगर ऐसे ही नौजवान हर गांव में आगे आएं, तो स्वच्छता अभियान को किसी सरकारी नारे की जरूरत ही नहीं रहेगी।”

अमलीपदर की माटी से निकले इन युवाओं ने दिखा दिया कि परिवर्तन आदेश से नहीं, संकल्प से आता है। उन्होंने वो कर दिखाया जो सरकार सालों से नहीं कर पाई—अपने गांव को साफ और अपने स्कूल को सुरक्षित बनाया।

अमलीपदर के इन युवा नायकों को सलाम, जिन्होंने यह साबित कर दिया—
“जब जनता जिम्मेदारी लेती है, तब विकास सच्चाई बनता है, नेताओं के द्वारा दिखाए जाने वाले बड़े-बड़े सपने और वादे नहीं।”

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग