RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

स्वच्छ भारत मिशन में बड़ा खोखला दावा? बीजापुर का गांव ODF घोषित, लेकिन जमीनी हकीकत में एक भी पूर्ण शौचालय नहीं”

बीजापुर छतीसगढ़ बस्तर के माटी समाचार 10 अक्टूबर 2025

घनश्याम यादव प्रधान संपादक

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत नैमेड़ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ‘खुले में शौच मुक्त’ (ODF) घोषित की जा चुकी है। लेकिन जमीनी सत्य इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है। स्थानीय जानकारी और तथ्यों से पता चलता है कि इस गांव में एक भी पूर्ण और कार्यशील शौचालय नहीं है, जो योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही और संभावित घोटाले की ओर इशारा करता है।

 

कागजों पर बने शौचालय, जमीन पर मलबा:

 

ग्राम पंचायत नैमेड़, जो राष्ट्रीय राजमार्ग 63 पर स्थित है, में शौचालय निर्माण की कहानी दो चरणों में बंटी हुई है।

 

· फेस-1: इस चरण में निर्मित 552 में से अधिकांश शौचालय जमींदोज हो चुके हैं। यह साबित करता है कि निर्माण की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की थी या फिर ये केवल कागजों पर ही अस्तित्व में थे।

· फेस-2: इस चरण के 119 शौचालयों का निर्माण कार्य आज तक अधूरा है। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इनमें से मात्र 20 अधूरे शौचालयों के फोटो अपलोड कर और जियो-टैगिंग करके उनका भुगतान कर दिया गया, जबकि ये शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह भुगतान भी हितग्राहियों के खाते में नहीं पहुंचाया गया।

 

आंकड़ों का खेल और सरकारी लापरवाही:

 

स्वच्छ भारत मिशन की केन्द्रीय वेबसाइट पर भी आंकड़ों की भारी उलट-पलट देखने को मिलती है।

 

· 66 शौचालयों के फोटो सरकारी वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं किए जा सके।

· 69 शौचालयों की स्वीकृति अभी तक नहीं मिली।

· 86 शौचालयों का भौतिक सत्यापन रिपोर्ट (फिजिकल रिपोर्ट) ही सरकार को नहीं भेजा गया।

 

ग्रामीणों की मजबूरी, जंगल का सहारा:

 

इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ग्रामीणों पर पड़ रहा है। ODF घोषित होने के बावजूद, ग्राम पंचायत नैमेड़ के लोगों को आज भी शौच के लिए जंगलों का रुख करना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के मूल उद्देश्य और ‘स्वच्छता अधिकार’ पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है।

 

अधिकारियों का जवाब: ‘कर देंगे पूरा’

 

इस संबंध में बीजापुर जिले के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर ईश्वर गुरला से बात की गई। उन्होंने मामले को स्वीकार करते हुए कहा, “जो अधूरे हैं उसे पूरा करेंगे और जिसका भुगतान नहीं किया जा सका, उसका भुगतान करेंगे।” हालांकि, सवाल यह बना हुआ है कि आखिर वर्ष 2021 से अधूरे कार्य के बावजूद इस ग्राम पंचायत को ODF कैसे घोषित कर दिया गया? क्या यह सिर्फ एक सरकारी फाइल को ‘सफल’ दिखाने का प्रयास है?

 

नैमेड़ ग्राम पंचायत का मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करता है। जब तक जमीनी स्तर पर कार्य की वास्तविक निगरानी और कड़े कार्रवाई का तंत्र नहीं बनाया जाता, तब तक स्वच्छ भारत जैसे महत्वपूर्ण मिशन केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। इस पूरे प्रकरण की तुरंत एक स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है, ताकि दोषियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके और ग्रामीणों को उनका हक मिल सके।

 

 

 

 

 

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग