कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी कर तत्कालिन कलेक्टर एवं
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को किया गया गुमराह।
वाटसप चैट में अमृत दास साहू द्वारा रंजीत सिंह के विरूद्ध षणयंत्र कर नौकरी के बाहर निकलवाने की योजना के बाद एक और बड़ा खुलासा सामने आया है।
कोंडागांव जिले से सत्मायानंद यादव की रिपोर्ट
बस्तर के माटी समाचार मामला है अमृत दास साहू द्वारा अन्य कार्यालयीन कर्मचारियों को अपने झासे में लेकर रंजीत सिंह के विरूद्ध कलेक्टर जिला बीजापुर से फर्जी शिकायत किया गया था। जिला पंचायत मे आवक पत्र 2839 08.07.2025 के साथ संलग्न किये गये दस्तावेजों के आधार पर स्पस्ट होता है कि सभी दस्तावेज कार्यालय से ही चोरी कर, वहीं फोटोकापी किया गया था। इस कृत्य के लिये अमृत दास साहू को पत्र क्र. 1394/स्था/जि.प./200-.21 बीजापुर 06.08.2020 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था।
जिसमें संबंधित से पूछा गया था की भर्ती संबंधित शासकीय दस्तावेज आपको कहॉ से प्राप्त हुई तथा आपके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के पीछे कार्यायल जिला पंचायत बीजापुर का बजट तथा आय-व्यय की जानकारी थी । साथ ही शासकीय दस्तावेज का गलत उपयोग किये जाने हेतु सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जावेगी, जिसके लिये वह स्वयं व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगें।
अमृत दास द्वारा इस संबंध में 11.08.2020 को दिये गये उत्तर से खुलासा हुआ है कि उक्त दस्तावेज उन्हें बीजापुर के श्री नंद किशोर राणा से प्राप्त हुई है जो पूर्व में सूचना के अधिकार के अंतर्गत उन्होंने प्राप्त किया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यह कि कौन सही है ?
अमृत दास साहू सही बोल रहे है या उनके द्वारा दिया गया उत्तर पूर्णतः झूठ है ?
नंद किशोर राणा ने आर.टी.आई. में यदि कार्यालय जिला पंचायत बीजापुर से रंजीत सिंह के भर्ती संबंधित दस्तावेज प्राप्त किये थे तो स्वयं शिकायत क्यों नहीं किये ?
नंद किशोर राणा ने क्या सही में अमृत दास साहू को रंजीत सिंह के भर्ती संबंधी दस्तावेज दिये थे ?
इस विषय की पुनः जॉच की जानी चाहिये। मिडिया के पास पुख्ता प्रमाण है कि उपरोक्त संलग्न दस्तावेजों जो अमृत दास ने कलेक्टर को शिकायत में लगाये थे उनमें विभाग के किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर एवं सत्य प्रतिलिपि की मोहर नहीं लगी हुई थी ?
इससे स्पस्ट हो कि रंजीत सिंह को पद से हटाने के लिये अमृत दास साहू ही वो खिलाड़ी है जिससे मंशाएं प्रशासन को गुमराह कर यह पूरा खेल रचा एवं एक निर्दोष अधिकारी को रास्ते के हटाने के लिये कूटरचना की । ऐसे अधिकारी को जिला प्रशासन तत्काल सेवा से बरखास्त कराए अविलम्ब वैधानिक कानूनी कार्यवाही प्रारंभ करें तथा निर्दोश व्यक्ति की पुनः सेवा बहाली की जा सके ।

