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इंदा गांव में उजड़ा आशियाना, होल्ड खाते और सिस्टम के दबाव में टूटा भरोसा

बेबस विधवा का घर टूटा, बाजार चौक में अकेली किराए की जिंदगी… और ‘सरकारी’ मकान कर्ज़ से!

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

प्रधानमंत्री आवास योजना—जिसका दावा है कि कोई गरीब बेघर नहीं रहेगा—मैनपुर जनपद के अंतर्गत इंदा गांव में गरीबों के लिए ही अभिशाप बनती नजर आ रही है। यहां एक गरीब, बेसहारा और दशे की बुद्धि विधवा महिला तिले बाई यादव का कच्चा मकान तुड़वा दिया गया, लेकिन आज तक उसे एक भी किस्त नसीब नहीं हुई। नतीजा—घर उजड़ गया, भरोसा टूटा और अब वह बाजार चौक के पास अकेली किराए के मकान में जिंदगी काटने को मजबूर है।

बिना किस्त के कैसे बनेगा प्रधानमंत्री आवास?

तिले बाई यादव को पंचायत और विभागीय कर्मचारियों ने बार-बार यह कहकर दबाव में लिया कि “आपके नाम पीएम आवास स्वीकृत है, जल्दी घर तोड़िए।” सरकारी भरोसे पर उन्होंने अपनी झोपड़ी गिरा दी। लेकिन उसके बाद न कोई कर्मचारी लौटा, न पंचायत ने सुध ली और न ही खाते में एक रुपया आया। आज हालत यह है कि विधवा महिला न घर बना पा रही है, न सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रही है।
बैंक पहुंचने पर तिले बाई को जवाब मिला—“आपका अकाउंट होल्ड है।”
पेंशन बंद,सरकारी सहायता बंद,
घर पहले ही टूट चुका और अब बाजार चौक में अकेली किराए की जिंदगी । तकलीफ इतनी की इलाज करा रहे प्राइवेट डॉक्टर को सुई तक का पैसा देने के लिए दूसरों से उधार मांगना पड़ रहा है ।

इससे बड़ा सिस्टम का तमाचा और क्या हो सकता है कि जिस महिला को सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वही सरकारी फाइलों में उलझाकर बेसहारा छोड़ दी गई।

उधार,गिरवी और आश से बन रहा है प्रधानमंत्री आवास 

वहीं दूसरी ओर, डींगर यादव की कहानी भी सिस्टम की पोल खोलती है। उन्हें भी प्रधानमंत्री आवास की एक भी किस्त नहीं मिली, लेकिन प्रशासनिक दबाव में मकान “पूरा दिखाने” के लिए उन्होंने कर्ज़ लिया, सोना गिरवी रखा और अपनी पूरी जमा पूंजी झोंक दी। सवाल उठता है—जब पैसा नहीं मिला, तो मकान बनाने का दबाव क्यों?

 

अफसर बोले जांच करवाएंगे 

मामले पर मैनपुर जनपद के सीईओ डी.एस. नागवंशी ने पूरे मामले का जांच का आश्वासन देते हुए कहा कि अगर अकाउंट होल्ड है तो कारण पता कर खुलवाया जाएगा। वहीं पंचायत सचिव का तर्क है कि PFMS में समस्या थी और “पैसा आ चुका है। मैं कल खुद तीले बाई को बैंक ले जाकर अकाउंट होल्ड को हटवाने के लिए कोशिश करूंगा” लेकिन बड़ा सवाल यह है कि घर तुड़वाने से पहले खाते और PFMS की जांच क्यों नहीं की गई? क्या सिर्फ जिले का टारगेट पूरा करने के लिए गरीबों की जिंदगी दांव पर लगा दी गई?

कब मिलेगी इंसाफ ?

कागजों में प्रधानमंत्री आवास योजना भले ही “सफल” हो, लेकिन इंदा गांव की जमीन पर यह योजना गरीब के लिए घर नहीं, तबाही का दस्तावेज बन चुकी है। अब देखना यह है कि जांच सिर्फ फाइलों में सिमटती है या सच में उजड़े आशियानों, होल्ड खातों और टूटे भरोसे को इंसाफ मिलता है।

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