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जब नियम बोझ ना बनें, तब इतिहास बनता है!

अमलीपदर बना सड़क सुरक्षा का ‘सुपरहिट मॉडल’

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

कहते हैं न—
जहाँ लोग कहें “कल कर लेंगे”,वहीं अमलीपदर ने कहा “आज ही कर लेते हैं”। सड़क सुरक्षा सप्ताह के नाम पर अक्सर भाषण, पोस्टर और फोटो खिंचवाने तक सीमित रहने वाले कार्यक्रमों के बीच अमलीपदर बाजार प्रांगण में जो हुआ, उसने पूरे जिले को आईना दिखा दिया। यहाँ जागरूकता कोई नारा नहीं, भीड़ बनकर आई। सुबह होते ही ऐसा नज़ारा रहा मानो लाइसेंस नहीं, बल्कि सरकारी आशीर्वाद बाँटा जा रहा हो।


युवक हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या छात्राएं
सब कह रहे हैं_
“पहिले नियम सीखेंगे, तब रोड पर निकलेंगे।” पुलिस और यातायात विभाग के संयुक्त आयोजन में ऐसा विशाल पंडाल सजा, कि लग रहा था—
“आज अमलीपदर में शादी नहीं, जिम्मेदारी का भोज है।”

यातायात विभाग के डीएसपी लितेश सिंह ने मलबहक बहन में यात्री परिवहन के गंभीर नुकसान और हेलमेट पर ऐसा ज्ञान बरसाया कि कई लोग सिर पकड़कर बोले
“अब तक बिना हेलमेट बच गए, ई त भगवान की कृपा हे।”

वहीं डीएसपी मंजूलता राठौर ने नशे में गाड़ी चलाने और नाबालिग ड्राइविंग पर ऐसा करारा तंज कसा कि कई अभिभावक मन ही मन बच्चों की चाबी छुपाने का प्लान बनाने लगे।
शिविर में हेलमेट वितरण हुआ,
लेकिन असली तोहफा था—
“सोच में बदलाव” ।
कन्या शाला की छात्राओं को ससम्मान भेंट देकर संदेश दिया गया कि
“सड़क सिर्फ गाड़ी चलाने की जगह नहीं, संस्कार दिखाने की भी जगह है।”


नियम से चलने की सोच का नतीजा यह रहा की_एक ही दिन में 375 लाइसेंस आवेदन! 35 लोगों को वहीं लर्निंग लाइसेंस,बाकियों को भरोसा—
“सरकारी काम है, लेकिन अब तेजी से होगा।”
अधिकारियों ने साफ कहा—
“सड़क सुरक्षा सप्ताह में ऐसा शिविर जिले में पहले कभी नहीं हुआ।”

भीड़ देख मन ही मन मुस्कुराने लगे और जनता ने बिना बोले मान लिया।
सरपंच हैमो नागेश, जनपद सदस्य निर्भय सिंह ठाकुर, समाजसेवी श्रवण सतपति, पूर्व सरपंच सेवन सिंह पुजारी, युवा नेता पंकज माझी सहित कई जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और वजन दिया।
पुलिस टीम से एसआई पी.के. जांगड़े, मेजर राजेश बघेल, रिजवान खान, और यातायात विभाग से एसआई रमा मरकाम कार्यक्रम के दौरान पूरी मुस्तैदी के साथ डटे रहे—कहीं भी “चलता है” का मौका नहीं छोड़ा गया।
अंत में एक बात साफ हो गई—
अगर प्रशासन जागे,पुलिस समझाए,
और जनता साथ दे—तो सड़क सुरक्षा सिर्फ सप्ताह नहीं, संस्कार बन सकती है।


आज अमलीपदर ने साबित कर दिया—
नियम डर से नहीं, समझ से माने जाते हैं। और हाँ,
अब पूरा जिला कह रहा है —
“सीख लो कुछ अमलीपदर वालों से”

 

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