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बकेला तीर्थ निर्माण पर मा.उच्च न्यायालय छ.ग. का आदेश,बकेला तीर्थ में भूमि प्रदाता स्व. गौतम चंद लोढ़ा का नाम अंकित करने का हाईकोर्ट का निर्देश

अजीत यादव

रायपुर बस्तर के माटी समाचार श्री पार्श्वनाथ भगवान चारो दादा गुरुदेव , पद्मावती माता , मां माजीसा माता , मां शीतला भवानी, भोमिया महराज,कुलदेवी बड़ माता के प्रताप से एवं स्व. फूलचंद मदनबाई लोढ़ा के पुण्य आशीर्वाद से बकेला पर ऐतिहासिक फैसला आया है…

25 सितम्बर 2024 को मा. उच्च न्यायालय ने WP(C)175/2023 की‌ सुनवाई में याचिका क्रमांक 177/2024 व याचिका क्रमांक 966/2024 को सुना तथा जिस पर बकेला ट्रस्ट के द्वारा तीर्थ निर्माण कराया जा रहा है वह भूमि आचार्य मनोज्ञ सागर की प्रेरणा से स्व. गौतम चंद जैन के द्वारा क्रय किया गया था यह स्वीकार किया……..
तथा बकेला ट्रस्ट को तीर्थ क्षेत्र के‌ प्रमुख स्थान पर “भूमि प्रदाता” के रुप मे “स्व. गौतम चंद जैन” परिवार का नाम सुंदर सुसज्जित पत्थर मे अंकित करने का आदेश पारित किया जिसे बकेला ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर डाकलिया ने सहर्ष स्वीकार किया….
‌‌ मा. उच्च न्यायालय के निर्देश पर तथा भूमि प्रदाता के रुप मे स्व. गौतम चंद जैन परिवार का नाम अंकित होने की बात पर  गौतम चंद जैन की धर्म सहायिका श्रीमती सरोज जैन , पुत्र – मनीष , मुकेश , रुपेश जैन ने 13 एकड़ 56 डिसमिल भूमि तीर्थ हेतु सहर्ष प्रदान कीया…..

इतिहास
सन् 1978 मध्यप्रदेश के ( वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य ) बिलासपुर जिले ( वर्तमान में कवर्धा जिला ) के अंतर्गत पंडरिया तहसील मुख्यालय से उत्तर पूर्व दिशा में मैकल पर्वत श्रृंखला से आच्छादित हाफ नदी के पार्श्व में स्थित वन्य ग्राम बकेला में 1250 वर्ष प्राचिन पार्श्वनाथ भगवान की 51 इंच ऊंची , पद्मासन में काले पत्थर से निर्मित मव्य प्रतिमा की जानकारी जैन  संघ पंडरिया को मिली । मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री  विरेन्द्र कुमार सखलेचा के सहयोग एवं “लोरमी पंडरिया क्षेत्र के तात्कालीन विधायक  फूल चंद लोढा” एवं स्व  रामलाल  डाकलिया के सक्रिय प्रयास से पुरातत्व विभाग ने जैन संघ को उक्त मुर्ति सौपी जो कि जैन मंदिर पंडरिया में वर्ष 1979 में दर्शनार्थ स्थापित की गयी । कुछ समय पश्चात छत्तीसगढ़ रत्न शिरोमणि प.पू. साध्वी मनोहर म.सा. की पावन निश्रा में उक्त ‌प्रतिमा की चल प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ । चल प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर साध्वी मनोहर म.सा. ने अपने सार गर्भित प्रवचन के दौरान कहा था की भविष्य में मूल स्थान में ही इस प्रतिमा का भव्य तीर्थ रु‌प सामने आयेगा ।


श्री बकेला तीर्थ का महास्वप्न लिये गौतम चंद जैन ने वशीमलाणी रत्न शिरोमणि ब्रम्हसर तीर्थोद्धारक आचार्य मनोज्ञ सागर म.सा की पावन ‌प्रेरणा व सानिध्य में बकेला ग्राम में अपने पूज्य पिता जी व माता जी स्व. फुलचंद मदन बाई लोढा की पुण्य स्मृति में तीर्थ निर्माण हेतु 13 एकड़‌ 56 डिसमिल भूमि आत्म कल्याण हेतु तीर्थ निर्माण की भावना से स्वद्रव्य से क्रय किया जिसमे अन्य कार्यो के लिये समाज व प्रशासन का भी सहयोग प्राप्त हुआ…
तीर्थ क्षेत्र में ज्ञानचंद लूनिया परिवार के द्वारा यात्रिक भवन का निर्माण कराया गया व भोजन शाला का निर्माण अनुप चंद देवराज बैद परिवार द्वारा कराया गया।

तीर्थ निर्माण संबंधी अवरोध को दूर करने में खरतरगच्छाधिपति प.‌पू. आचार्य जिन मणिप्रभ सूरिश्वर म.सा. , गणाधीस पन्यास प्रवर विनय कुशल मुनि म.सा. , तप चक्रवर्ती विराग मुनि म.सा. व मनोहर शिशु शुभद्रा म.सा. , नवकार जपेश्वरी शुभंकरा म.सा. की विशेष प्रेरणा रही ।
व श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय जी कांकरिया (कन्नु कांकरिया ) , लोढा भाईपा रायपुर के संरक्षक गौतम चंद लोढा,   नरेंद्र लोढा ,  प्रकाश लोढा  हरख पारख , रवि लोढा , तकदीर  डाकलिया , रमेश चोपड़ा , मुकेश डाकलिया का विशेष मार्गदर्शन मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद शुक्ला , अमिताब मिश्रा शरद मिश्रा भूपेंद्र सिंह ठाकुर , मुकेश ठाकुर  का विशेष आभार..

इस ऐतिहासिक आदेश पर सर्व जैन समाज ने प्रसन्नता जाहिर की है। तथा उदारमना स्व. गौतम चंद लोढ़ा परिवार की अनुमोदना की है ।

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