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इंदा गांव में बुलडोजर की गरज । देवभूमि संरक्षण या बदले की कारबाई ?

देवभूमि खाली होने पर कई लगों की चेहरों पर खुशी पर ये किसी राजनीतिक रंजीश का हिस्सा तो नहीं ?

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

ग्राम पंचायत इंदागांव में शुक्रवार को हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने प्रशासनिक पारदर्शिता और पंचायती नीतियों को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय ‘घास भूमि’ (खसरा नंबर 740 का भाग) पर बने एक घर को जेसीबी से तोड़ने की कार्रवाई को जहां कुछ लोग ‘देवभूमि को मुक्त कराने’ की पहल मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे निजी रंजिश और पक्षपात की कार्यवाही बता रहे हैं।

पंचायत ने दावा किया है कि 28 मई को प्रस्ताव पारित कर कब्जाधारी को नोटिस दिया गया था। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर शुक्रवार को तहसीलदार, पटवारी, कोटवार और पुलिस बल की मौजूदगी में घर गिरा दिया गया।

 

 

हालांकि, स्थानीय लोग बताते हैं कि यह कब्जा करीब 35 साल पुराना है और उसी पंचायत द्वारा दो बार ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव से निर्माण को मान्यता दी गई थी। ऐसे में अब उसी पंचायत द्वारा इसे अवैध बताकर तोड़ना क्या न्यायोचित है?

35 साल बाद टूटा मकान: क्या ‘देवभूमि’ की रक्षा या पंचायत से टकराव की सजा?

इंदागांव में शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही ने एक ओर जहां लोगों को ‘देवस्थल’ की जमीन खाली होने की राहत दी, वहीं दूसरी ओर कई ग्रामीणों में भय और असमंजस का माहौल भी खड़ा हो गया। 5 साल से महिला समूह के द्वारा उक्त जगह को लेकर अदालत के चक्कर भी लगा रहे थे । आज अतिक्रमण हटने पर महिला समूह को ईद का चाँद नजर आ गया ।

पीड़ित किशोर कुमार दांता ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उन्हें निशाना बनाने के लिए की गई है क्योंकि उन्होंने पंचायत के कुछ कथित घोटालों — जैसे चबूतरा चोरी और बोर खनन — की शिकायत  कलेक्टर को की थी। उनका कहना है कि गांव में अन्य अतिक्रमणों को अनदेखा कर केवल उनके मकान को निशाना बनाया गया।

 

 

कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं द्वारा विरोध जताने पर उन्हें पुलिस वाहन से थाने ले जाया गया, और बाद में मकान के अंदर का सामान निकाल कर पूरी संरचना ध्वस्त कर दी गई।

पंचायत की कार्रवाई या राजनीति की पटकथा? इंदागांव में जेसीबी की दस्तक ने मचाया बवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने पंचायती लोकतंत्र में जवाबदेही और निष्पक्षता की सीमाओं को एक बार फिर उजागर कर दिया है। तहसीलदार गेंदालाल साहू ने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि “घास भूमि” के रूप में दर्ज है, घास जमीन पर कोई भी अगर मकान बनाता है तो वह गैर कानूनी होता है । पंचायत अधिनियम के तहत पंचायत उसे जगह को खाली करने का अधिकार रखता है । यदी पहले पंचायत ने इसे आबादी भूमि कहकर आवंटित किया था , तो पंचायत को भी जवाब देना होगा।

अब सवाल यह है कि —

क्या पहले के ग्रामसभा प्रस्तावों को नकारना कानून सम्मत है?

क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सभी पर समान रूप से लागू होगी या केवल विरोधियों पर ?

इस घटना ने प्रशासन, पंचायत और कुछ ग्रामीणों के बीच अविश्वास की एक नई दीवार खड़ी कर दी है। आगे की न्यायिक सुनवाई और पंचायत की कार्रवाई तय करेगी कि यह केवल एक ‘अतिक्रमण हटाओ’ मुहिम थी, या इससे कहीं अधिक गहरी कहानी छुपी है।

गांव में सार्वजनिक कार्यक्रम में उपयोग होने वाली जगह पर अगर कोई भी अतिक्रमण करेगा तो पंचायत उसे पर बुलडोजर चलाने के लिए सक्षम है । (मानसिंह बस्तीआ, पंच)

यह स्थल देव भूमि स्थल है । यहां पर दुर्गा पूजा और रथयात्रा का आयोजन किया जाता है । इसलिए यहां पर जगह का कमी आ रहा था । कई बार हमने सामने बोले को नोटिस दिए हैं, लेकिन वह अनदेखी कर रहा था । पहले भी महिला समूह के साथ इनका कैसे चल रहा था । पंचायत का सहमति से आज यह कदम उठाया गया ।

कांति बस्तिआ ,उपसरपंच, इंदा गांव

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