सत्यानंद यादव
कोण्डागांव बस्तर के माटी समाचार , 17 जनवरी वन मंडल कोण्डागांव अंतर्गत नगर से सटे खड़कघाट क्षेत्र में सड़क किनारे खड़े एक हरे-भरे महुआ के पेड़ को दिनदहाड़े काट दिया गया, और वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह मामला कोण्डागांव के पर्यटन क्षेत्र माने जाने वाले खड़कघाट से कुछ दूरी पर भीरागांव ‘ब’ गांव जाने वाले मार्ग का है। यहां गणेश देवांगन की भूमि पर सड़क साइड स्थित वर्षों पुराने प्राकृतिक महुआ के पेड़ को गुरुवार 15 जनवरी को खुलेआम काट दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि पेड़ काटने के लिए न तो किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई और न ही वन विभाग अथवा राजस्व विभाग को इसकी पूर्व सूचना दी गई।

दिनदहाड़े हुई इस अवैध कटाई ने वन विभाग की कुंभकर्णी नींद, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी—तीनों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद भी विभाग ने न तो स्थल का निरीक्षण किया और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की।
जब मामले में वन विभाग से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो विभाग ने जिम्मेदारी से बचते हुए पूरे प्रकरण को राजस्व विभाग का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। वन मंडल कोण्डागांव के नारंगी परिक्षेत्र अधिकारी विजयंत तिवारी से संपर्क करने पर उन्होंने फोन पर ही इसे राजस्व विभाग से जुड़ा मामला बताते हुए मीडिया को किसी भी प्रकार का बयान देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे विभागीय उदासीनता और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति और अधिक उजागर हो गई।
इधर, पूरे मामले पर भीरागांव ‘ब’ के सरपंच धीरन सोरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की लापरवाही के चलते हरे-भरे पेड़ों को दिनदहाड़े काटा जा रहा है। यह घटना वन विभाग की पूरी तरह से विफल कार्यप्रणाली को दर्शाती है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि सूचना मिलने के बावजूद विभाग की निष्क्रियता के चलते कटे हुए पेड़ की लकड़ी दूसरे दिन जप्ती से पहले ही मौके से गायब हो गई, जिससे अवैध कटाई करने वालों के हौसले और अधिक बुलंद हो गए हैं।

स्थानीय लोगों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

