RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

अब तेरा क्या होगा कालिया?” – ओपेरा, ओहदे और ओछी संस्कृति की पटकथा ।

बस्तर की माटी (BKM NATIONAL NEWS)न्यूज़, गरियाबंद

“ये हाथ नहीं… नारियल है, जो मंच पर फूटता है!” और जैसे ही नारियल फूटा, वैसे ही फूट गई मर्यादा, नियम और जिम्मेदारी।
ओपेरा दुर्गा मंदिर के नाम पर लगे इस बदनाम शो में नंगा नाच को ‘कला’,ताली को ‘संस्कृति’,और वर्दी को ‘तमाशबीन’ बना दिया गया।

उरमाल से सीधा बलांगीर—

जहाँ नारियल फोड़कर ओपेरा का शुभारंभ करने वाले चौकी प्रभारी शायद भूल गए कि “खाकी पहनने से किरदार अपने-आप ईमानदार नहीं हो जाता।” जिस मंच को संस्कार का मंच होना था वह सस्ते मनोरंजन का अड्डा बन गया ।


और फिर एंट्री होती है—उड़ीसा की “सनी लियोनी” उर्फ निशा महाराणा की,
जो नृत्य के नाम पर वही परोस रही हैं,
जिसे देख शोले का गब्बर भी कह उठे—
“बहुत नाइंसाफी है रे!”

सूर्य मंदिर ओपेरा की मंच जहां-जहां गया कुर्सियां हिलता गया । जिस मंच ने पहले छत्तीसगढ़ में एसडीएम, पुलिसकर्मी और अफसरों की कुर्सियाँ हिलाईं,उसी मंच ने अब उड़ीसा में भी इज्जत और नौकरी दोनों को ओवरएक्टिंग का फालूदा बना दिया। बलांगीर में जनता ने वो किया जो छत्तीसगढ़ में नहीं हो पाया—तुरंत विरोध, तुरंत FIR। नतीजा? निशा महाराणा पर केस,भुवनेश्वर तक पुलिस की खोजबीन,
और गिरफ्तारी की सुई सर पर मंडराने लगा और कभी भी निशा महाराणा गिरफ्तार हो सकते हैं ।


वहीं हमारे छत्तीसगढ़ में—“ताली भी बजी,नोट भी उड़े,फ्लाइंग किस भी चले,और बाद में सस्पेंशन भी।”
बलांगीर मै अब हालात ऐसे हैं कि
आयोजन समिति के दो लोग अंदर,
नारियल फोड़ने वाले थाना प्रभारी को SP का कारण बताओ नोटिस मिल चुका है । जिसे लेकर आम लोग फुसफुसा रहे हैं—
*“अब तेरा क्या होगा कालिया?”*

सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया
जब खुद ओपेरा कलाकार संघ ने कहा—
“नृत्य के नाम पर अश्लीलता बंद होनी चाहिए।” यानि अब कहानी के विलेन इतने बढ़ गए कि हीरो भी कंफ्यूज है कि किसे बचाए और किसे छोड़ें । जब कलाकार ही कहें की सीमा पर हो गई है,तो समझीए मंच सच में गिर चुकी है ।

आज जनता की मांग साफ है—
पहले निशा का नशा उतरे,फिर उसके मंच सजाने वालों पर भी कानून का डंडा चले।
क्योंकि अगर यही चलता रहा तो कल को बच्चे पूछेंगे—
“संस्कृति क्या होती है?” और जवाब मिलेगा—“यही तो सबसे बड़ा सस्पेंस है!”

“नाच बुरा नहीं,अश्लीलता अपराध है।
मंच मंदिर है, मंदिर में आरती होता है _तमाशा नहीं । भगवा रंग के झंडा लगे सूर्य मंदिर अपेरा जैसे मंदिर मैं जहां अन्य कलाकार,कला को भगवान मानते हैं, वहीं मंदिर में नंगा नाच और तमाशा कब तक चलेगा ?” अगर आज कानून ने पर्दा नहीं गिराया तो कल समाज खुद थिएटर खाली कर देगा ।

अब देखना ये है कि ओपेरा के नाम से शुरू हुआ ये पटकथा किसी फिल्मी डायलॉग पर रुकेगा या सीधे क्लाइमेक्स वाला एक्शन सीन के बाद !

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग