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स्कूल में बजा “नशा छोड़ो” का अलार्म_औषधि निरीक्षक बोले—ये फैशन नहीं, भविष्य का फ्यूज उड़ाने वाला स्विच है ।

बस्तर की माटी न्यूज़, (BKM NATIONAL NEWS)गरियाबंद
रिपोर्टर _ राजीव लोचन

कभी-कभी समाज को आईना दिखाने के लिए भाषण नहीं, बल्कि सख्त सच की जरूरत होती है। और कुछ ऐसा ही “नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत देवभोग के मन्नू पब्लिक स्कूल में देखने को मिला, जहां औषधि निरीक्षक विभाग ने नशे के खिलाफ विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों और समाज को साफ संदेश दिया—“नशा कोई कूल स्टाइल नहीं, बल्कि जीवन की फाइल को करप्ट करने वाला वायरस है।”


कार्यक्रम में औषधि निरीक्षक धर्मवीर सिंह ध्रुव ने बच्चों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कुछ युवा नशे को स्टेटस सिंबल समझने की भूल कर रहे हैं, जबकि असलियत में यह उनके सपनों की स्पीड ब्रेकर बन जाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर “जिज्ञासा” से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह “जरूरत” और फिर “मजबूरी” में बदल जाती है।
कार्यक्रम में फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने भी बच्चों को दवाइयों के सही उपयोग और दुरुपयोग के बीच का फर्क समझाया। उन्होंने बताया कि कुछ दवाइयां, जो इलाज के लिए बनी हैं, उन्हें गलत तरीके से नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “दवाई अगर डॉक्टर की सलाह से ली जाए तो इलाज करती है, और अगर दोस्तों की सलाह से ली जाए तो जिंदगी का ‘इलाज’ कर देती है।” उनके इस कथन ने बच्चों को और सोचने पर मजबूर भी किया।

देवभोग दवा विक्रेता संघ के संचालकों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और प्रभावी बना दिया। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी गंभीरता से इस विषय को सुना। खास बात यह रही कि बच्चों को यह समझाया गया कि नशा केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि परिवार, करियर और समाज—तीनों को नुकसान पहुंचाता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सामूहिक शपथ ली कि वे नशे से दूर रहेंगे और जहां कहीं भी नशे से संबंधित गतिविधि की जानकारी मिलेगी, उसे संबंधित अधिकारियों तक जरूर पहुंचाएंगे। यह शपथ केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक मजबूत संकल्प के रूप में सामने आई।

आज के दौर में, जब कुछ युवा नशे को “एडवेंचर” समझकर अपनी जिंदगी की स्क्रिप्ट खुद ही खराब कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आ रहे हैं। अगर इसी तरह जागरूकता की ये मशाल जलती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब समाज से नशे का अंधेरा छंटेगा और युवा अपने सपनों की असली उड़ान भरेंगे—बिना किसी “नशे के नकली पंख” के।

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