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बीजापुर छात्रावास गर्भवती छात्राओं का मामला गरमाया: जांच के आदेश, प्राचार्य-अधीक्षक को नोटिस की तैयारी; 

बीजापुर बस्तर के माटी समाचार     जिले के एक छात्रावास से जुड़ा छात्राओं के गर्भवती होने का मामला अब और अधिक गरमा गया है। मामले में लगातार सामने आ रही नई जानकारियों और विरोधाभासी बयानों के बीच प्रशासनिक जांच तेज कर दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर संबंधित प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक को नोटिस जारी किया जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 15 मार्च 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कुछ समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में यह खबर प्रकाशित और प्रसारित हुई थी कि पोटाकेबिन हाई स्कूल छात्रावास की तीन छात्राएं गर्भवती हैं। विभागीय जांच में बताया गया कि समाचार में उल्लेखित दो छात्राएं छात्रावास में निवासरत या अध्ययनरत नहीं थीं, बल्कि वे स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय में पढ़ती थीं। वहीं एक छात्रा छात्रावास में अध्ययनरत थी, लेकिन वह लगभग पांच माह से अनुपस्थित बताई गई है। विभाग ने इन खबरों को भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए लोगों से अपील की है कि अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें।

इधर मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए पत्रकारों की टीम संबंधित क्षेत्र में पहुँची और परिजनों से बातचीत की। इस दौरान एक छात्रा के पति ने बताया कि वह स्वयं भी छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता है। उसे कुछ अधिकारियों द्वारा बुलाकर यह पूछा गया कि उसकी पत्नी छात्रावास में रहती थी या नहीं। उम्र के बारे में पूछे जाने पर उसने बताया कि दोनों की उम्र लगभग 17 वर्ष है।

परिजनों के अनुसार जब जच्चा-बच्चा कार्ड के बारे में जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि मितानिन के माध्यम से जच्चा-बच्चा कार्ड और नाबालिग छात्रा को बीजापुर जिला मुख्यालय ले जाया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि छात्राओं की स्वास्थ्य जांच किसके आदेश पर कराई गई और जच्चा-बच्चा कार्ड किसके निर्देश पर बनाया गया।

वहीं छात्रावास अधीक्षिका का कहना है कि उनके छात्रावास में कोई भी छात्रा निवासरत नहीं थी। दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी के बयान में एक छात्रा के छात्रावास में अध्ययनरत होने और दो छात्राओं के छात्रावास से संबंधित न होने की बात सामने आई है। इन विरोधाभासी बयानों ने पूरे मामले को और उलझा दिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद संबंधित प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इधर इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक विक्रम शाह मंडावी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि बीजापुर जिले में बालिकाएं सुरक्षित नहीं हैं और इस गंभीर मामले को वे आगामी विधानसभा सत्र में उठाएंगे। विधायक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस बीच एक और महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है कि जब महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार नाबालिग विवाह को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाता है, तब प्रशासनिक स्तर पर छात्राओं के संदर्भ में “शादी हो चुकी है” जैसे शब्दों का उपयोग किया जाना कई लोगों को समझ से परे लग रहा है। इससे यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या नाबालिग विवाह के मामलों को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका स्पष्ट और प्रभावी है या नहीं।

उठ रहे प्रमुख सवाल

• यदि छात्राएं छात्रावास में नहीं रहती थीं तो उनका नाम छात्रावास से क्यों जोड़ा गया?

• स्वास्थ्य विभाग द्वारा छात्राओं की जांच किसके आदेश पर कराई गई?

• नाबालिग होने के बावजूद जच्चा-बच्चा कार्ड किसके निर्देश पर बनाया गया?

• छात्रा के पांच माह से अनुपस्थित रहने की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई?

• नाबालिग विवाह को रोकने के दावों के बीच बयान में “शादी” का उल्लेख क्यों

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