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HMPV वायरस का भारत में आगमन: बच्चों और बुजुर्गों को सतर्क रहने की जरूरत


राजीव लोचन

गरियाबंद बस्तर के माटी समाचार HMPV (ह्यूमन मेटानेमोवायरस) वायरस, जो रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का कारण बनता है, ने पहली बार भारत में दस्तक दी है। यह वायरस खासतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

लक्षण और खतरा

HMPV वायरस के कारण सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज सुनाई देने जैसे लक्षण उभर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार:

लगभग 10-20% संक्रमित मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच सकते हैं।

केवल 5% मरीजों में ऑक्सीजन की कमी की समस्या हो सकती है, और ये वही लोग हैं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमजोर है।


2001 में पहली बार सामने आया था वायरस

HMPV वायरस का पहली बार पता 2001 में चला था, लेकिन हाल के दिनों में यह चीन में तेजी से फैल रहा है। चीन ने इस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए हैं, जिनमें मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना और नियमित सैनिटाइजेशन शामिल है।


भारत में सतर्कता की जरूरत

भारत में भी विशेषज्ञों ने एहतियाती उपायों को अपनाने की सलाह दी है, विशेषकर सर्दी-खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए।
बचाव के उपाय:

1. मास्क का नियमित उपयोग करें।


2. सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ से बचें।


3. हाथों को बार-बार धोएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।


4. बच्चों और बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच करवाते रहें।

बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष चेतावनी

विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन बुजुर्गों और बच्चों को सर्दी-खांसी की समस्या पहले से है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। समय पर डॉक्टर से संपर्क करें और किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें।


HMPV वायरस से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करें और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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