संवाददाता _ राजीव लोचन बस्तर के माटी (BKM)

अमलीपदर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन लोगों को पक्का मकान मिलना चाहिए, उनमें से कई अब भी अपने झुग्गी-झोपड़ी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अमलीपदर निवासी गंगाराम यादव, जिनकी उम्र 70 वर्ष है, वर्षों से एक पक्के मकान की आस लगाए बैठे थे। अब जाकर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुआ है, लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी देरी क्यों हुई?
झुग्गी-झोपड़ी में बिताए कष्टमय दिन
गंगाराम यादव पिछले कई वर्षों से एक झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहे थे। झोपड़ी की हालत इतनी खराब थी कि गर्मी के दिनों में तपिश से राहत नहीं मिलती थी, बारिश में पानी टपकता था और सर्दियों में ठंड से बचाव का कोई साधन नहीं था। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जहां जरूरतमंदों तक तुरंत पहुंचना चाहिए था, वहीं गंगाराम यादव को मकान मिलने में वर्षों लग गए।

कई अपात्रों को मिला आवास, पर वास्तविक जरूरतमंद वंचित
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इस योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों को क्यों नहीं मिल पा रहा है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पहले से ही पक्के मकान में रहने वाले लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान मिल गए हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने इस योजना के तहत मिले मकानों को व्यवसायिक उपयोग के लिए शटर वाला मकान बना लिया है। वहीं, गंगाराम यादव जैसे वास्तविक जरूरतमंद अब तक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर रहे।
सर्वे पर उठ रहे सवाल

गंगाराम यादव को हाल ही में मकान मिला है, लेकिन यह सवाल उठना लाजमी है कि यदि उन्हें समय पर मकान स्वीकृत हुआ होता, तो शायद वर्षों तक झोपड़ी में कष्टमय जीवन बिताने की नौबत नहीं आती। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और सर्वे की खामियों की ओर इशारा करता है। क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सर्वे के दौरान सही हितग्राहियों की पहचान नहीं की गई, जिसके कारण वास्तविक जरूरतमंद आज भी योजना से वंचित हैं।
प्रशासन की लापरवाही का उदाहरण
गंगाराम यादव का मकान अमलीपदर के मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। यहां से रोजाना कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, लेकिन किसी की नजर उनकी झोपड़ी की दुर्दशा पर नहीं गई। प्रशासन की यह उदासीनता सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों की मांग: सर्वे की हो नए सिरे से जांच
क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए सिरे से सर्वे करवाया जाए। सही हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जाए। इसके अलावा, जिन लाभार्थियों को मकान स्वीकृत हुआ है लेकिन निर्माण कार्य अधूरा है, उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता दी जाए ताकि वे मकान का निर्माण पूरा कर सकें।
गंगाराम यादव को वर्षों बाद मकान का लाभ तो मिल गया है, लेकिन सवाल यह है कि अगर यह लाभ समय पर मिलता, तो शायद उन्हें झोपड़ी के कष्ट से पहले ही राहत मिल जाती।