खबर का असर: इंदा गांव में मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन, आत्महत्या के मामलों में आएगी कमी ।
संवाददाता_राजीव लोचन बस्तर के माटी (BKM)

मैनपुर, इंदागांव में लगातार हो रहे आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाया है। ग्रामीणों की मांग पर मंगलवार को गांव में मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का नेतृत्व बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) मैनपुर गजेंद्र सिंह ध्रुव ने किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं, के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना और आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकना है।

ग्रामीणों की पहल से मिली राहत
इंदागांव में बीते कुछ दिनों से आत्महत्या की घटनाओं में वृद्धि हुई थी, जिससे गांव के लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के सरपंच गुरबारी ध्रुव और ग्राम पंचायत के पंचगणों ने मिलकर ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने घर-घर जाकर युवाओं और उनके माता-पिता से मुलाकात की और उन्हें मानसिक तनाव से उबरने के लिए सही मार्गदर्शन दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता
गांव के निवासियों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गार्गी यादव ने भी इस मामले में त्वरित संज्ञान लिया और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम को गांव भेजा। इस टीम ने गांव के युवाओं और ग्रामीणों से खुलकर बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। साथ ही, उन्हें तनाव से बचने और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी सलाह दी गई।
शिविर में दी गईं महत्वपूर्ण सलाहें
मानसिक स्वास्थ्य शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को मानसिक तनाव के कारणों, उसके लक्षणों और उससे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शिविर में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:

- मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योग और ध्यान के अभ्यास की सलाह
- नशे और अवसाद से बचने के उपाय
- जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह
- पारिवारिक संवाद और सामुदायिक समर्थन को मजबूत करने की आवश्यकता
ग्रामीणों ने जताई संतुष्टि
इस शिविर से गांव के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति नई जागरूकता मिली है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार जताया है। सरपंच गुरबारी ध्रुव ने कहा कि इस शिविर से गांव में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक माहौल बनेगा और आत्महत्या के मामलों में कमी आएगी।
प्रशासन की इस पहल से ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में सफलता मिली है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस तरह के शिविर भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे गांव के युवाओं और अन्य ग्रामीणों को मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।