अवैध ईंट परिवहन में पलटा ट्रैक्टर, ड्राइवर गंभीर
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM)गरीयाबंद
गरियाबंद जिले में अवैध रूप से ईंट परिवहन करते हुए एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। इस दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि ये ईंटें प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बनाए जा रहे मकानों में सप्लाई की जा रही थीं।

ईंट भट्टों का गोरखधंधा और वन विनाश
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि कोकड़ी माल की नदी किनारे करीब 10 से 12 लाख ईंटें बनाई जा चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में ईंटें बनाने के लिए कितने पेड़ काटे गए होंगे और उन्हें जलाया गया होगा। यदि वास्तव में 12 लाख ईंटें जली हैं, तो इससे क्षेत्रीय पर्यावरण पर भारी असर पड़ा है।
हालांकि, वन विभाग और तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब भी अवैध ‘लाल ईंट’ के कारोबार को लेकर सवाल किया जाता है, तो अधिकारी गोलमोल जवाब देकर खानापूर्ति जैसी कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर देते हैं।

सरकारी आवासों में भी लाल ईट का इस्तेमाल
चौंकाने वाली बात यह है कि खुद प्रधानमंत्री आवास योजना में भी अवैध लाल ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इस पर स्पष्ट प्रतिबंध है। यह सीधे-सीधे सरकारी नियमों की अनदेखी और तंत्र की नाकामी को दर्शाता है।
एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर हैं, वृक्षारोपण के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर पेड़ कटाई और अवैध ईंट भट्टों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
परिवहन विभाग की चुप्पी और अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में डालता है। आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है?
इस हादसे ने न केवल अवैध ईंट परिवहन और निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर चिंताएं जताई हैं। ज़रूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर त्वरित, सख्त और पारदर्शी कार्रवाई करें ताकि भविष्य में ऐसे हादसों और अवैध गतिविधियों पर लगाम लग सके।

