स्वच्छ भारत मिशन की पोल खोलता कोयबा पंचायत का अधूरा शौचालय
पहली बारिश में ही उड़ गई छत, 6 महीने से अटका निर्माण
बस्तर के माटी न्यूज़,(BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का सपना क्या कागजों पर ही सिमट कर रह गया है? मैनपुर ब्लॉक के कोयबा पंचायत में 3.5 लाख रुपये की लागत से बन रहा सामुदायिक शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गया। हालात इतने बदतर हैं कि पहली ही बारिश में लेमटर की जगह,कमजोर अस्बेस्टस की छत, तेज हवाओं में उड़ गई। ताज्जुब की बात यह है कि 6 महीने बीतने के बावजूद शौचालय का सेप्टिक टैंक तक तैयार नहीं हुआ है।

शौचालयों पर ताले, नल-बोरिंग नदारद
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। मगर कोयबा पंचायत की स्थिति इस सपने का मजाक उड़ाती दिख रही है। मैनपुर ब्लॉक के कई अन्य गांवों में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं। मैनपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कई सामुदायिक शौचालयों पर जड़े हुए ताले चिख चिख कर कह रही है “अंदर आना मना है” । कुछ जगहों पर नल लगाए तो गए, लेकिन बोरिंग ही नहीं की गई।

कौन है जिम्मेदार?
कोयबा पंचायत के तकनीकी सहायक से जब इस अधूरे प्रोजेक्ट और घटिया निर्माण को लेकर सवाल किया गया तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। बाद में उनका फोन भी स्विच ऑफ मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने कभी निर्माण स्थल का निरीक्षण करना भी जरूरी नहीं समझा। सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक सामुदायिक शौचालयों में टाइल्स, 24 घंटे पानी-बिजली और महिला-पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन यहां तो मानक पूरी तरह ध्वस्त हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश
गांव की महिला व पंच राजेश्वरी माझी गुस्से में कहती हैं, “सरकार पैसे देती है, लेकिन निगरानी करने वाले अफसर क्यों सो रहे हैं? क्या इस तरह खुले में शौच से मुक्ति का सपना पूरा होगा?”
बड़े सवाल
_क्या दोषी अफसरों पर होगी कार्रवाई?
_अधूरे शौचालय कब पूरे होंगे?
_जनता के पैसों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
_ क्या यह भ्रष्टाचार की नई मिसाल नहीं?

