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सैटेलाइट निगरानी और अत्याधुनिक उपकरणों के बावजूद अवैध रेत परिवहन, जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल

सवालों के घेरे में वन विभाग: हाई-टेक निगरानी के बावजूद टाइगर रिजर्व में रेत माफिया हावी?

अत्याधुनिक कैमरे और सैटेलाइट फेल! उदंती-सीतानदी में धड़ल्ले से रेत का अवैध परिवहन

बस्तर की माटी न्यूज़, (BKM NATIONAL NEWS) गरियाबंद।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (बफर जोन) परिक्षेत्र इंदागांव-धुर्वागुड़ी में एक बार फिर अवैध रेत परिवहन का मामला सामने आया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की टीम ने अभ्यारण्य क्षेत्र से अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे एक सोनालिका (नीला रंग) के ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया है, जो बिना नंबर प्लेट के था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यवाही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत की जा रही है।

गांववालों का बड़ा आरोप: रोज 4-5 ट्रैक्टर करते हैं रेत ढुलाई

हालांकि, गांववालों के मुताबिक, इस इलाके से रोजाना 4 से 5 ट्रैक्टर चिखली पानी नाला से रेत निकालकर धुर्वागुड़ी की ओर ले जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरी तरह से संगठित नेटवर्क का हिस्सा है, जो विभागीय मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।

सवाल खड़े करता है निगरानी तंत्र

यह मामला एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जिस अभ्यारण्य क्षेत्र की निगरानी सैटेलाइट, ड्रोन और हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से की जा रही है, वहां लगातार कई दिनों तक रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन कैसे हो गया? क्या यह विभागीय लापरवाही का मामला है, या फिर इसमें जिम्मेदार कर्मचारी की मिलीभगत भी है?

पूर्व में भी कई बार यहाँ से अवैध रेत परिवहन की खबरें सामने आई हैं। पिछली कार्यवाहियों में भी ऐसे ही दो ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर राजसात की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन तब भी यह सवाल उठा था कि क्यों एक ट्रैक्टर परिक्षेत्र कार्यालय में रखा गया और दूसरा अधिकारी के निजी निवास पर? इस तरह की प्रक्रियाओं से विभाग पर सवाल और संदेह गहराता है।

कौन सी धाराओं में मामला दर्ज?
वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं 27, 29, 31, 51(1) और 52 तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 के तहत अपराध दर्ज किया है।

धारा 27 – अभयारण्य में बिना अनुमति के प्रवेश और गतिविधियाँ प्रतिबंधित।

धारा 29 – अभयारण्य में शिकार या किसी भी प्रकार की हानिकारक गतिविधि पर रोक।

धारा 31 – संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माण या विकास कार्य पर प्रतिबंध।

धारा 51(1) – उपरोक्त का उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान।

धारा 26 (भारतीय वन अधिनियम) – अवैध रूप से वन संसाधनों का दोहन करने पर सजा का प्रावधान।

विभागीय बयान और जनता की नाराज़गी
वन विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वे हर शिकायत पर कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। मगर ग्रामीणों का कहना है कि यह घटनाएं विभाग के दावों की पोल खोलती हैं।

सवाल यह भी उठता है कि क्या विभागीय अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी या फिर हमेशा की तरह निचले स्तर के कर्मचारियों पर दोष डालकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?

क्यों नहीं थम रहा रेत माफिया का खेल?

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व एक संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र है, जिसकी रक्षा करना वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सैटेलाइट और अत्याधुनिक कैमरों के बावजूद अवैध उत्खनन हो रहा है, तो यह विभागीय विफलता और जिम्मेदारों की लापरवाही का स्पष्ट संकेत है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस रेत माफिया का खेल बंद नहीं होगा।

“सिर्फ एक ट्रैक्टर जब्त करने से नहीं रुकेगा यह अवैध कारोबार”, ग्रामीणों का दो टूक कहना है।

इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग को एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

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