जंगल से भटककर आबादी में पहुंचा नीलगाय, हजारों ग्रामीणों की उमड़ी भीड़
हाईटेक निगरानी के दावों पर उठे सवाल
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व से अपने झुंड से भटक कर जंगल से बाहर निकला लगभग तीन वर्ष का नीलगाय इन दिनों इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंचे इस नीलगाय को देखने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में जबरदस्त उत्सुकता देखी गई और देखते ही देखते जन सैलाब उमड़ पड़ा।
जानकारी के अनुसार यह नीलगाय उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व से भटकते हुए चिखली-छैला जंगल के रास्ते शाही डोंगरी के पास पहुंचा, जहां वह अत्यधिक थकावट के चलते करीब दो घंटे तक बैठा रहा। बताया जा रहा है कि नीलगाय जंगल से भटकते हुए करीब 12 से 14 किलोमीटर की दूरी तय कर आबादी क्षेत्र तक पहुंच गया।

ग्रामीणों द्वारा जब इसकी सूचना वन विभाग को दी गई, तब विभाग को नीलगाय की लोकेशन की जानकारी मिली। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
सैटेलाइट कैमरों और हाईटेक निगरानी के दावे करने वाले उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व (USTR) को आखिर एक नीलगाय के जंगल से बाहर निकलकर इतनी दूरी तय करने की भनक क्यों नहीं लगी?
ग्रामीणों की सूचना के बाद ही विभाग का सक्रिय होना, हाईटेक निगरानी के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
सूचना मिलते ही सामान्य वन मंडल के अधिकारी , उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के कर्मचारी और अन्य वन कर्मी मौके पर पहुंचे और नीलगाय को सुरक्षित रेस्क्यू करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान नीलगाय अचानक खैरमाल की ओर भागा और वहां स्थित एक चेक डैम में पहुंचकर थकान के कारण बैठ गया तथा पानी पीने लगा।

स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने माइक से अनाउंसमेंट कर ग्रामीणों को मौके से हटने की अपील की, जिसे ग्रामीणों ने समझदारी से मानते हुए सहयोग किया। कुछ देर बाद नीलगाय फिर से शाही डोंगरी की ओर बढ़ गया, जिसके बाद वनकर्मी उसका ट्रैकिंग अभियान चलाने में जुट गए।
खबर लिखे जाने तक वन विभाग की ओर से यह पुष्टि की गई है कि नीलगाय शाही डोंगरी की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में पहली बार नीलगाय की मौजूदगी ने ग्रामीणों में खासा उत्साह पैदा किया। खबर फैलते ही हजारों लोग नीलगाय को देखने के लिए उसके आगे-पीछे घूमते रहे, जिससे मौके पर भीड़ लगातार बढ़ती चली गई।

फिलहाल वन विभाग नीलगाय की सुरक्षित निगरानी और उसे दोबारा जंगल क्षेत्र की ओर मोड़ने के प्रयास में जुटा हुआ है, वहीं यह घटना वन्यजीव निगरानी व्यवस्था और हाईटेक दावों पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है।

