बस्तर के माटी
कृष्ण कुमार कुंजाम ब्यूरो चीफ बस्तर
जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 10 फरवरी 1910 को हुआ भूमकाल आंदोलन (भूमकाल विद्रोह) बस्तर के इतिहास का वह महाविद्रोह था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत को अंदर तक हिला दिया था। यह आंदोलन बस्तर के स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का प्रतीक है।
लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज, इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दिवस पर भी छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने न तो कोई शासकीय अवकाश घोषित किया है और न ही कोई सरकारी स्मरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उल्टा, आज ही के दिन पूरे प्रदेश के हर ब्लॉक में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का आयोजन कर हमारे भूमकाल महाविद्रोह के महान शहीदों—
वीर गुंडाधुर, डेबरीधुर, झाड़ा सिरहा, मासा मड़कामी, रोंडा पेदा सहित अन्य क्रांतिकारियों—का घोर अपमान किया जा रहा है।
यह बस्तर और छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के सम्मान के साथ अन्याय है, जिसे बस्तर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। हमारे वीर क्रांतिकारियों का यह अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जानबूझकर 10 फरवरी जैसे ऐतिहासिक दिन पर शासकीय कार्यक्रम आयोजित करना कहीं न कहीं बस्तर की आवाज़ को दबाने और हमारे वीर योद्धाओं के बलिदान को नज़रअंदाज़ करने का प्रयास है।
इस कृत्य की पूरा समाज घोर निंदा करता है और बस्तर सहित पूरे आदिवासी समाज मूल समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।

