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विकास के नाम पर PMGSY कर रहा वनों का विनाश,PMGSY सड़क निर्माण में गड़बड़ी, किसानों की जमीन पर जबरन खुदाई पर ग्रामीणों को है ऐतराज़ 

घनश्याम यादव

बीजापुर बस्तर के माटी समाचार जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रही सड़क को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन पर जबरन खुदाई कर खेतों को बर्बाद किया गया, वहीं बिना अनुमति सागौन के पेड़ों को भी उखाड़ दिया गया। क्या है पूरा मामला, देखिए ये खास रिपोर्ट।

 

बीजापुर जिले के कडेर गांव से दुरधा और कडेर से कैका तक बनाई जा रही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क अब विवादों में है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान विभाग ने बिना अनुमति किसानों की जमीन पर जबरन खुदाई कर दी, जिससे खेतों को भारी नुकसान हुआ है।

ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण कार्य के दौरान वन विभाग की अनुमति के बिना सागौन जैसे कीमती पेड़ों को भी उखाड़कर फेंक दिया गया।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण तय मापदंडों के विपरीत किया जा रहा है। सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

 सड़क निर्माण के दौरान इमरती पेड़ों की कटाई एवं उखाड़ने की अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई है। इसका खुलासा तब हुआ जब ठेकेदार से फोन पर बातचीत हुई उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रामीण से लिखित मे अनुमति नहीं ली गई है और सड़क मे आने वाले इमरती पेड़ों की छंटनी की गई है जबकि मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं है इमारती पेड़ों को उखाड़ दिया गया है और काट दिया गया है जलाउ लकड़ी को जला दिया गया।

 

इस संबंध में सरपंच कडेर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ठेकेदार झूठ बोल रहा है जबकि मैंने जनपद सीईओ को फोन पर अवगत कराया था सड़क बनाने के दौरान जबरन किसानों की जमीन खोदने के लिए मना की गई थी बावजूद ठेकेदार के द्वारा जबरन ग्रामीणों का खेतों को खोद कर बर्बाद कर दिया गया। इस संबंध मे वन विभाग के रेंजर को फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसिब नही किया।

इस मामले में तकनीकी पहलू भी सामने आया है। इंजीनियर राजेन्द्र सिंह का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी डालकर रोलर से दबाना जरूरी होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया जा रहा है, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस सडक निर्माण के लिए सूचना बोर्ड लगाया गया है वह भी निरंक है और दूसरे कैका सड़क निर्माण की जानकारी का बोर्ड ही गायब है

सड़क निर्माण के दौरान इमारती पेड़ों की कटाई एवं उखाड़ने की अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई है। इसका खुलासा तब हुआ जब ठेकेदार से फोन पर बातचीत हुई उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रामीण से लिखित मे अनुमति नहीं ली गई है और सड़क मे आने वाले इमरती पेड़ों की छंटनी की गई है जबकि मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं है इमरती पेड़ों को उखाड़ दिया गया है और काट दिया गया है जलाऊ लकड़ी को जला दिया गया। इस संबंध में सरपंच कडेर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ठेकेदार झूठ बोल रहा है जबकि मैंने जनपद सीईओ को फोन पर अवगत कराया था सड़क बनाने के दौरान जबरन किसानों की जमीन खोदने के लिए मना की गई थी बावजूद ठेकेदार के द्वारा जबरन ग्रामीणों का खेतों को जेसीबी से खोद कर बर्बाद कर दिया गया। इस संबंध मे वन विभाग के रेंजर को फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसिब नही किया।

इस मामले में तकनीकी पहलू भी सामने आया है। इंजीनियर राजेन्द्र सिंह का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी डालकर रोलर से दबाना जरूरी होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया जा रहा है, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस सडक निर्माण के लिए सूचना बोर्ड लगाया गया है वह भी निरंक है 

मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर शिकंजा कसा जाएगा। फिलहाल, बीजापुर से ये मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

 हालांकि अपुष्ट सूत्रों से यह भी खबर मिल रही है कि कार्यपालन अभियंता प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यशैली से चाहे जिले के मीडिया जनप्रतिनिधि या अधिकारी नाराज होंगे भी तो उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता उनकी पकड़ ऊपर तक हैँ

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