मेला से अस्पताल, अस्पताल से श्मशान… आखिर आकाश की मौत का जिम्मेदार कौन?
संदिग्ध मौत पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, बहन ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार; वायरल वीडियो के बाद गरमाया मामला
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
मैनपुर थाना क्षेत्र में युवक आकाश कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब केवल एक मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून के पालन और न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मृतक की बहन आकांक्षा कश्यप ने पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना देने के बावजूद मैनपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। अब परिवार निष्पक्ष जांच, तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
“भैया ने खुद बताई थी पूरी कहानी”
परिजनों के अनुसार, 29 जून की रात आकाश कश्यप किसी तरह घायल अवस्था में घर पहुंचे। उन्होंने परिवार को बताया कि मेले में करीब 8 से 10 युवकों ने डंडों से बेरहमी से मारपीट की और बाद में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने फेंक कर चले गए।

परिवार का कहना है कि उस समय अस्पताल बंद था। जान का खतरा महसूस होने पर आकाश पूरी रात अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस के नीचे पड़े रहे। सुबह अस्पताल खुलने पर उन्होंने चिकित्सकों को अपनी तकलीफ बताई। प्राथमिक दवा मिलने के बाद वे घर लौट आए, लेकिन दर्द लगातार बढ़ता गया। इसके बाद परिजन उन्हें फिर मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से बेहतर इलाज के लिए गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान 1 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई।

मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया गया।
“एफआईआर बाद में होगी” कहकर लौटाने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के बाद जब मृतक की बहन मैनपुर थाना पहुंची और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तब पुलिस ने यह कहते हुए मामला दर्ज नहीं किया कि “पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही एफआईआर होगी।”
इसी बात से आहत होकर मृतक की बहन ने पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को आवेदन देकर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं का हवाला देते हुए तत्काल अपराध दर्ज करने की मांग की है।
ग्रामीणों के बीच भी उठ रहे सवाल
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मृतक का परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर है, जबकि जिन युवकों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे गांव के प्रभावशाली परिवारों से जुड़े बताए जाते हैं। इसी कारण मामले को दबाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बहन का वीडियो हुआ वायरल
इस बीच मृतक की बहन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह भावुक होकर लोगों से अपने भाई के लिए न्याय की अपील करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
जब हमारे संवाददाता ने मैनपुर थाना प्रभारी सिद्धेश्वर प्रताप सिंह से इस संबंध में चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मृतक अक्सर नशे की हालत में रहता था और मौत के अन्य कारण भी हो सकते हैं। उनका कहना है कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। यदि रिपोर्ट और जांच में हत्या की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है…
अगर आरोपों के अनुसार मेले जैसी भीड़भाड़ वाली जगह पर किसी युवक को आठ-दस लोगों ने डंडों से पीटा, तो क्या उस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था? क्या किसी के मोबाइल में कोई फोटो या वीडियो नहीं है? या फिर सच कहीं मौजूद है लेकिन सामने आने से डर रहा है?

आज के दौर में छोटी-सी घटना भी कैमरे में कैद हो जाती है। ऐसे में इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कोई ठोस दृश्य साक्ष्य सामने नहीं आना कई सवाल छोड़ जाता है। दूसरी ओर, यदि पीड़ित परिवार के आरोप सही हैं तो यह केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंच की लड़ाई भी बन जाता है।
कहा जाता है कि कानून सबके लिए बराबर होता है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कानून की रफ्तार भी सभी के लिए बराबर होती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि गरीब का आवेदन पहले तौला जाता है और बाद में पढ़ा जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में परिस्थितियां अलग हो जाती हैं?
फिलहाल सच दो दस्तावेजों के बीच खड़ा है—एक तरफ परिजनों के आरोप और दूसरी तरफ पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार। अब यह देखना होगा कि जांच किस दिशा में जाती है, पुलिस किन तथ्यों तक पहुंचती है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाता है जिसकी गुहार उसकी बहन लगातार लगा रही है।
अब पूरे जिले की नजर पुलिस अधीक्षक गरियाबंद की कार्रवाई पर टिकी हुई है। उम्मीद यही है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर होगी, ताकि न किसी निर्दोष पर कार्रवाई हो और न किसी दोषी को कानून से बचने का अवसर मिले।

