गुरुजी का ‘ज्ञान-रस’ या ‘जाम-रस’? शिक्षा के मंदिर में कथित ‘रस + आ + यन’ का प्रैक्टिकल!
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
कहते हैं कि विद्यालय ज्ञान का मंदिर होता है, जहां बच्चों के भविष्य की नींव रखी जाती है। लेकिन मैनपुर विकासखंड के देवझर (अमली) स्थित एक स्कूल से सामने आए कथित वीडियो ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है कि लोग पूछ रहे हैं—यह विद्यालय है, स्टाफ रूम है या फिर “रस + आ + यन” की कोई नई प्रयोगशाला?
वीडियो में कार्यालय कक्ष के भीतर दो शिक्षक कथित रूप से गिलास, बोतल और चखने के सामान के साथ दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि उबले हुए अंडे, मसाले और अन्य चखने की तैयारी भी मौजूद थी। अब सवाल यह है कि यह “मिड-डे मील” का नया मेन्यू था या फिर “मिड-डे मस्ती” का विशेष आयोजन?
गिलास में जो तरल पदार्थ साफ दिखाई दे रहा है, उसे देखकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अब जनता यही कह रही है—कहीं जांच में यह भी न लिख दिया जाए कि यह “केमिस्ट्री लैब” का कोई विशेष घोल था! क्योंकि हमारे यहां कई बार आंखों से दिखने वाली चीजें भी जांच की फाइल में पहुंचते-पहुंचते अपना परिचय बदल देती हैं।
सबसे बड़ा सवाल उन मासूम बच्चों का है, जो उसी समय स्कूल परिसर में खेल रहे थे। बताया जा रहा है कि कुछ बच्चे कार्यालय की ओर झांक भी रहे थे। अब सोचिए, जिन बच्चों को किताबों से “अ” से अनार और “क” से कबूतर सीखना चाहिए, वे अगर “ग” से गिलास और “ज” से जाम का दृश्य देखेंगे, तो उनके मन में कैसी तस्वीर बनेगी?
कहीं ऐसा तो नहीं कि शिक्षा विभाग के इस नए “पाठ्यक्रम” में अब “रस + पान” को भी एक वैकल्पिक विषय बना दिया गया है? और “रस + आ + यन” का मतलब अब रसायन विज्ञान नहीं, बल्कि किसी और “रसायन” का व्यावहारिक प्रदर्शन हो गया है!
विडंबना देखिए… बाहर बच्चे मैदान में खेल रहे थे और अंदर कथित रूप से “पार्टी पीरियड” चल रहा था। उधर भविष्य घंटी बजने का इंतजार कर रहा था, इधर गिलास खाली होने का।

आरोप यह भी है कि जब मीडिया ने पूरे मामले पर सवाल पूछे, तो जवाब देने के बजाय कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। यानी सवाल शिक्षा पर था, लेकिन जवाब में शिष्टाचार भी अनुपस्थित मिला।
अब नजर शिक्षा विभाग पर है। क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में पहले जांच बैठती है, फिर जांच की समीक्षा होती है, फिर समीक्षा की समीक्षा… और आखिर में फाइल किसी अलमारी में जाकर “उच्च शिक्षा” लेने लगती है।
हालांकि, मैनपुर के बीईओ देवनाथ बघेल ने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब जनता यही देखना चाहती है कि कार्रवाई भी उतनी ही साफ दिखाई देगी, जितना वीडियो में दिखाई दे रहा कथित दृश्य… या फिर पूरा मामला सरकारी फाइलों के “सस्पेंस चैप्टर” में शामिल हो जाएगा।
आखिर सवाल सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है, जो स्कूल के बाहर “शिक्षा का मंदिर” लिखती है और भीतर क्या हो रहा है, यह देखने का समय शायद निरीक्षण रजिस्टर को भी नहीं मिल पाता।
फिलहाल इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है—
“गुरुजी स्कूल में ज्ञान बांटने आए थे… या ‘ज्ञान-रस’ की जगह ‘जाम-रस’ का विशेष सत्र लेने?”
“कहीं ऐसा तो नहीं कि बच्चों को ‘रसायन विज्ञान’ पढ़ाने से पहले गुरुजी खुद ‘रस + आ + यन‘ का लाइव डेमो दे रहे थे?”

